संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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॥ श्रीहरिः ॥
संक्षिप्त ब्रह्मपुराणकी विषय-सूची
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| १- नैमिषारण्यमें सूतजीका आगमन, पुराणका आरम्भ तथा सृष्टिका वर्णन | ९ | २४- दक्षद्वारा भगवान् शिवकी स्तुति | ८९ |
| २- राजा पृथुका चरित्र ...... | १२ | २५- एकाम्रकक्षेत्र तथा पुरुषोत्तमक्षेत्रकी महिमा ... | ९८ |
| ३- चौदह मन्वन्तरों तथा विवस्वान्की संततिका वर्णन | १७ | २६- अवन्तीके महाराज इन्द्रद्युम्नका पुरुषोत्तमक्षेत्रमें जाना तथा वहाँकी इन्द्रनीलमयी प्रतिमाके गुप्त होनेकी कथा | १०० |
| ४- वैवस्वत मनुके वंशजोंका वर्णन | १९ | २७- राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा अश्वमेधयज्ञ तथा पुरुषोत्तम-प्रासाद-निर्माणका कार्य ...... | १०५ |
| ५- राजा सगरका चरित्र तथा इक्ष्वाकुवंशके मुख्य-मुख्य राजाओंका परिचय ...... | २४ | २८- राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा भगवान् श्रीविष्णुकी स्तुति | १०९ |
| ६- चन्द्रवंशके अन्तर्गत जहु, कुशिक तथा भृगुवंशका संक्षिप्त वर्णन | २७ | २९- राजाको स्वप्नमें और प्रत्यक्ष भी भगवान्का दर्शन, भगवत्प्रतिमाओंका निर्माण, स्थापन और यात्राकी महिमा | ११४ |
| ७- आयु और नहुषके वंशका वर्णन, रजि एवं ययातिका चरित्र | ३० | ३०- मार्कण्डेय मुनिको प्रलयकालमें बालमुकुन्दका दर्शन और उनका वरदान प्राप्त होना | ११९ |
| ८- ययाति-पुत्रोंके वंशका वर्णन | ३४ | ३१- मार्कण्डेश्वर शिव, वटवृक्ष, श्रीकृष्ण, बलभद्र एवं सुभद्राके दर्शन-पूजनका माहात्म्य | १२६ |
| ९- क्रोष्टु आदिके वंशका वर्णन तथा स्यमन्तक-मणिकी कथा | ४० | ३२- पुरुषोत्तमक्षेत्रमें भगवान् नृसिंह तथा श्वेतमाधवका माहात्म्य ...... | १२८ |
| १०- जम्बूद्वीप तथा उसके विभिन्न वर्षोंसहित भारत-वर्षका वर्णन ...... | ४७ | ३३- मत्स्यमाधवकी महिमा, समुद्रमें मार्जन आदिकी विधि, अष्टाक्षरमन्त्रकी महत्ता, स्नान, तर्पण-विधि तथा भगवान्की पूजाका वर्णन ...... | १३३ |
| ११- प्लक्ष आदि छः द्वीपोंका वर्णन और भूमिकामान | ५० | ३४- भगवान् पुरुषोत्तमकी पूजा और दर्शनका फल, इन्द्रद्युम्नसरोवरके सेवनकी विधि एवं महिमाका वर्णन तथा ज्येष्ठकी पूर्णिमाको दर्शनका माहात्म्य | १४० |
| १२- पाताल और नरकोंका वर्णन तथा हरिनाम-कीर्तनकी महिमा ...... | ५४ | ३५- ज्येष्ठपूर्णिमाको श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्राके स्नानका उत्सव तथा उनके दर्शनका माहात्म्य | १४२ |
| १३- ग्रहों तथा भुवः आदि लोकोंकी स्थिति, श्रीविष्णुशक्तिका प्रभाव तथा शिशुमारचक्रका वर्णन | ५७ | ३६- गुण्डिचा-यात्राका माहात्म्य तथा द्वादश यात्राकी प्रतिष्ठा-विधि | १४४ |
| १४- तीर्थ-वर्णन | ६० | ३७- तीर्थोंके भेद, वामनका बलिसे भूमिदान-ग्रहण तथा गङ्गाजीका महेश्वरकी जटामें गमन ..... | १४७ |
| १५- भारतवर्षका वर्णन | ६२ | ३८- गौतमके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति, शिवका गौतमको जटासहित गङ्गाका अर्पण तथा गौतमी गङ्गाका माहात्म्य | १५० |
| १६- कोणादित्यकी महिमा | ६४ | ३९- भागीरथी गङ्गाके अवतरणकी कथा ...... | १५४ |
| १७- भगवान् सूर्यकी महिमा ...... | ६७ | ४०- वाराहतीर्थ, कुशावर्त, नीलगङ्गा और कपोततीर्थकी महिमा; कपोत और कपोतीके अद्भुत त्यागका वर्णन | १५७ |
| १८- सूर्यकी महिमा तथा अदितिके गर्भसे उनके अवतारका वर्णन | ७२ | ४१- दशाश्वमेधिक और पैशाचतीर्थका माहात्म्य .. | १६२ |
| १९- श्रीसूर्यदेवकी स्तुति तथा उनके अष्टोत्तरशत नामोंका वर्णन ...... | ७५ | ||
| २०- पार्वतीदेवीकी तपस्या, वरदान-प्राप्ति तथा उनके द्वारा ग्राहके मुखसे ब्राह्मण-बालकका उद्धार | ७८ | ||
| २१- पार्वतीजीका स्वयंवर और महादेवजीके साथ उनका विवाह ...... | ८१ | ||
| २२- देवताओंद्वारा महादेवजीकी स्तुति, कामदेवका दाह तथा महादेवजीका मेरुपर्वतपर गमन ... | ८४ | ||
| २३- दक्ष-यज्ञ-विध्वंस | ८७ |