भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

संक्षिप्त ब्रह्मपुराण

Brahma Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 89

* दक्ष-यज्ञ-विध्वंस * ८७

दक्ष-यज्ञ-विध्वंस

ऋषियोंने कहा— ब्रह्मन्! वैवस्वत मन्वन्तरमें प्रचेताओेंके पुत्र प्रजापति दक्षका अश्वमेध-यज्ञ कैसे नष्ट हुआ?

ब्रह्माजी बोले— ब्राह्मणो! महादेवजीने सती-देवीका प्रिय करनेकी इच्छासे जिस प्रकार दक्षके यज्ञका विध्वंस किया था, उसका वर्णन करता हूँ। पूर्वकालकी बात है, महादेवजी मेरुगिरिके ज्योतिःस्थल नामक शिखरपर, जो सब प्रकारके रत्नोंसे विभूषित और पलंगकी भाँति फैला हुआ था, विराजमान थे। गिरिराजकुमारी पार्वती सदा उनके पार्श्वभागमें बैठी रहती थीं। आदित्य, वसु, अश्विनीकुमार, गुह्यकोंसहित कुबेर, महामुनि शुक्राचार्य तथा सनत्कुमार आदि महर्षि उनकी सेवामें उपस्थित रहते थे। अत्यन्त भयंकर राक्षस एवं महाबली पिशाच, जो अनेक रूप धारण करनेवाले तथा नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंसे सुसज्जित थे, भगवान् शिवके समीप रहा करते थे। भगवान्‌के पार्षद भी वहाँ मौजूद थे। वे सब अग्निके समान तेजस्वी जान पड़ते थे। महादेवजीकी इच्छासे भगवान् नन्दीश्वर भी वहाँ खड़े रहते थे। नदियोंमें श्रेष्ठ गङ्गाजी मूर्तिमती होकर उनकी सेवामें संलग्न रहती थीं। इस प्रकार परम सौभाग्यशाली देवर्षियों और देवताओंसे पूजित होकर भगवान् शङ्कर वहाँ सदा निवास करने लगे। कुछ कालके बाद प्रजापति दक्षने शास्त्रोक्त विधिके अनुसार यज्ञ करनेकी तैयारी की। उनके उस यज्ञमें इन्द्र आदि सम्पूर्ण देवता स्वर्गसे आकर एकत्रित होने लगे। वे अग्निके समान तेजस्वी देवता दक्षके अनुरोधसे प्रकाशमान विमानोंपर बैठकर गङ्गाद्वारको गये। पृथ्वी, आकाश तथा स्वर्गलोकमें रहनेवाले सभी देवता प्रजापतिके पास हाथ जोड़कर उपस्थित हुए। आदित्य,वसु, रुद्र, साध्य तथा मरुद्गण—ये सब यज्ञमें भाग लेनेके लिये भगवान् विष्णुके साथ वहाँ पधारे थे। ऊष्मप, धूमप, आज्यप तथा सोमप नामवाले देवता भी अश्विनीकुमारोंके साथ वहाँ उपस्थित थे। ये तथा और भी अनेक भूत-प्राणियोंका समुदाय वहाँ एकत्रित हुआ था। जरायुज, अण्डज, स्वेदज तथा उद्भिज्ज भी उस यज्ञमें सम्मिलित थे। देवतालोग अपनी स्त्रियों तथा महर्षियोंके साथ वहाँ पधारे थे।

देवताओंको वहाँ जाते देख गिरिराजकुमारी पार्वतीने भगवान् शङ्करसे पूछा—‘भगवन्! ये इन्द्र आदि देवता कहाँ जाते हैं?’

महादेवजी बोले— महाभागे! प्रजापति दक्ष अश्वमेध-यज्ञ करते हैं। उसीमें सब देवता जा रहे हैं।

देवीने पूछा— महाभाग! आप इस यज्ञमें क्यों नहीं जाते? ऐसी कौन-सी रुकावट है, जिससे आपका वहाँ जाना नहीं होता?