संक्षिप्त ब्रह्मपुराण
Brahma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें* दक्षद्वारा भगवान् शिवकी स्तुति * ८९
पूछा—'बताइये, आप कौन हैं?'
वीरभद्रने कहा—मैं न देवता हूँ, न दैत्य हूँ। न इस यज्ञमें भोजन करने आया हूँ और न कौतूहलवश इसे देखनेको ही मेरा आना हुआ है। मैं इस यज्ञका विध्वंस करनेके लिये आया हूँ। मेरा नाम वीरभद्र है। मैं रुद्रके कोपसे प्रकट हुआ हूँ। ये भद्रकाली हैं। इनका प्रादुर्भाव पार्वतीदेवीके क्रोधसे हुआ है। ये देवाधिदेव महादेवजीके भेजनेसे यज्ञके समीप आयी हैं। राजेन्द्र! तुम देवदेव भगवान् उमापतिकी शरणमें जाओ। उनका क्रोध भी वरदानके ही तुल्य है।
तब प्रजापति दक्ष मन-ही-मन भगवान् शङ्करकी शरणमें गये। उन्होंने प्राण और अपानको हृदयमें रोककर यत्नपूर्वक उनका ध्यान किया। तब भगवान् शिव प्रकट हुए और उन्होंने मुसकराकर पूछा—'कहो, तुम्हारा कौन-सा कार्य सिद्ध करूँ?' तब दक्षने हाथ जोड़कर कहा—'भगवन्! यदि आप मुझपर प्रसन्न हैं अथवा यदि मैं आपका प्रिय एवं कृपापात्र हूँ तो मुझे यह वरदान दें—'जो भी भोजन-सामग्री यहाँ खा-पी ली गयी, नष्ट कर दी गयी, यज्ञका जो सामान चूर-चूर करके फेंक दिया गया, वह सब बहुत दिनोंसे यत्न करके संचित किया गया था। महेश्वर! आपकी कृपासे यह व्यर्थ न जाय।'
ब्रह्माजीने कहा—भगवान् शङ्करने 'तथास्तु' कहकर दक्षकी कामना पूर्ण की। प्रजापति दक्षने भगवान्से वरदान पाकर पृथ्वीपर घुटने टेक दिये और भगवान् शिवका स्तवन आरम्भ किया।
दक्षद्वारा भगवान् शिवकी स्तुति
दक्ष बोले—देवदेवेश्वर! आपको नमस्कार है। अन्धकासुरको मारनेवाले रुद्र! आपको प्रणाम है। देवेन्द्र! आप बलमें श्रेष्ठ और देवता तथा दानवोंद्वारा पूजित हैं।* आप सहस्राक्ष^१, विरूपाक्ष^२ और त्र्यक्ष^३ कहलाते हैं। यक्षराज कुबेरके आप इष्टदेव हैं। आपके हाथ और पैर सब ओर हैं। नेत्र, मस्तक और मुख भी सब ओर हैं। आपके सब ओर कान हैं। आप संसारमें सबको व्याप्त करके स्थित हैं। शङ्कुकर्ण^४, महाकर्ण^५, कुम्भकर्ण^६, अर्णवालय^७, गजेन्द्रकर्ण^८, गोकर्ण^९, शतकर्ण^{१०}, शतोदर^{११}, शतावर्त^{१२}, शतजिह्व^{१३},
* दक्ष उवाच—नमस्ते देवदेवेश नमस्तेऽन्धकसूदन। देवेन्द्र त्वं बलश्रेष्ठ देवदानवपूजित॥
१. सहस्रों नेत्रोंवाले, २. विकराल नेत्रोंवाले, ३. तीन नेत्रोंवाले, ४. कीलके समान नुकीले कानोंवाले, ५. बड़े-बड़े कानोंवाले, ६. घड़ेके समान कानोंवाले, ७. समुद्र जिनका निवासस्थान है वे, ८. हाथीके समान कानोंवाले, ९. गायके समान कानोंवाले, १०. सैकड़ों कानोंवाले, ११. सैकड़ों उदरवाले, १२. सैकड़ों भँवरवाले, १३. सैकड़ों जिह्वावाले।