भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

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( १२ ) सूत्र विषय पृष्ठ चौथा पाद १-२ सांख्योक्त प्रकृतिकी अवैदिकताके प्रसंगमें 'अव्यक्त' शब्दपर विचार और उसके शरीरवाचक होनेका कथन...... १११-११३ ३-५ वेदोक्त प्रकृति स्वतन्त्र और जाननेयोग्य नहीं, परमेश्वरके अधीन रहनेवाली उसीकी शक्ति है, इसका प्रतिपादन....... ११३-११५ ६-७ 'अव्यक्त' शब्द प्रकृतिसे भिन्न अर्थका वाचक क्यों है? इसका युक्तिपूर्ण विवेचन........................................ ११५-११७ ८-१० श्रुतिमें 'अजा' शब्द परब्रह्मकी शक्ति विशेषका बोधक है, सांख्योक्त प्रधानका नहीं, इसका प्रतिपादन............. ११७-१२० ११-१३ 'पञ्च-पञ्चजनाः'शब्दसे सांख्योक्त प्रकृतिके पचीस तत्त्वोंका श्रुतिमें वर्णन किया गया है, इस मान्यताका खण्डन....... १२१-१२३ १४-१५ आकाश आदिकी सृष्टिमें ब्रह्म ही कारण है तथा उस प्रसंगमें आये हुए 'असत्' आदि शब्द भी उसीके वाचक हैं इसका समर्थन........................................... १२३-१२५ १६-२२ कौषीतकि श्रुतिमें सोलह पुरुषोंका कर्ता एवं ज्ञेयतत्त्व ब्रह्मको ही बताया गया है, जीव, प्राण या प्रकृतिको नहीं, इसका सयुक्तिक उपपादन........................... १२६-१३१ २३-२९ ब्रह्मकी अभिन्न निमित्तोपादान कारणताका निरूपण....... १३१-१३७ दूसरा अध्याय पहला पाद १-११ सांख्योक्त प्रधानको जगत्का कारण न माननेमें सम्भावित दोषोंका उल्लेख और उनका परिहार............ १३८-१४६ १२ अन्य वेदविरोधी मतोंका निराकरण........................... १४६ १३-१४ ब्रह्मकारणवादके विरुद्ध उठायी हुई शंकाओंका समाधान.... १४६-१४९ १५-२० युक्तियों और दृष्टान्तोंद्वारा सत्कार्यवादकी स्थापना एवं ब्रह्मसे जगत्की अनन्यता.................................... १४९-१५२