भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 253, कुल 486 में से

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पृष्ठ 253

२५० वेदान्त-दर्शन [ पाद ४ इन्द्रियोंकी उत्पत्तिका कथन गौण है; यही मानना ठीक है और ऐसा मान लेनेपर श्रुतियोंके वर्णनमें कोई विरोध नहीं रह जाता है। सम्बन्ध— प्रकारान्तरसे उस श्रुतिका गौणत्व सिद्ध करते हैं— तत्प्राक्छुतेश्च ॥ २ । ४ । ३ ॥ तत्प्राक्छुतेः= श्रुतिके द्वारा उन आकाशादि तत्त्वोंके पहले इन्द्रियोंकी उत्पत्ति कही गयी है, इसलिये; च=भी (तेज आदिसे वाक् आदि इन्द्रियकी उत्पत्ति कहनेवाली श्रुति गौण है)। व्याख्या—शतपथ-ब्राह्मणमें ऋषियोंके नामसे इन्द्रियोंका पाँच तत्त्वोंकी उत्पत्तिसे पहले होना कहा गया है (६। १। १। १) तथा मुण्डकोपनिषद्में भी इन्द्रियोंकी उत्पत्ति पाँच भूतोंसे पहले बतायी गयी है। इससे भी यही सिद्ध होता है कि आकाशादि तत्त्वोंसे इन्द्रियोंकी उत्पत्ति नहीं हुई है, अतः तेज आदि तत्त्वोंसे वाक् आदिकी उत्पत्ति सूचित करनेवाली वह श्रुति गौण है। सम्बन्ध— अब दूसरी युक्ति देकर उक्त बातकी ही पुष्टि करते हैं— तत्पूर्वकत्वाद्वाचः ॥ २ । ४ । ४ ॥ वाचः=वाणीकी उत्पत्तिका वर्णन; तत्पूर्वकत्वात्=तीनों तत्त्वोंमें उस ब्रह्मके प्रविष्ट होनेके बाद है (इसलिये तेजसे उसकी उत्पत्ति सूचित करनेवाली श्रुति गौण है)। व्याख्या—उस प्रकरणमें यह कहा गया है कि 'उन तीन तत्त्वरूप देवताओंमें जीवात्माके सहित प्रविष्ट होकर उस ब्रह्मने नामरूपात्मक जगत्की रचना की।' (छा० उ० ६। ३। ३) इस प्रकार वहाँ जगत्की उत्पत्ति ब्रह्मके प्रवेशपूर्वक बतायी गयी है; इसलिये भी यही सिद्ध होता है कि समस्त इन्द्रियोंकी उत्पत्ति ब्रह्मसे ही हुई है, तेज आदि तत्त्वोंसे नहीं। अतः तेज- तत्त्वसे वाणीकी उत्पत्ति सूचित करनेवाली श्रुतिका कथन गौण है। सम्बन्ध—इस प्रकार इन्द्रियोंकी उत्पत्ति भी उस ब्रह्मसे ही होती है