भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

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सूत्र १८-१९ ] अध्याय २ २५९ सम्बन्ध- इन्द्रियोंसे मुख्य प्राणकी भिन्नता सिद्ध करनेके लिये दूसरा हेतु प्रस्तुत करते हैं- भेदश्रुतेः ॥ २ । ४ । १८ ॥ भेदश्रुतेः = इन्द्रियोंसे मुख्य प्राणका भेद सुना गया है, इसलिये (भी मुख्य प्राण उनसे भिन्न तत्त्व सिद्ध होता है)। व्याख्या- श्रुतिमें जहाँ इन्द्रियोंका प्राणके नामसे वर्णन आया है, वहाँ भी उनका मुख्य प्राणसे भेद कर दिया गया है (मु० उ० २।१।३ तथा बृह० उ० १।३।३) तथा प्रश्नोपनिषद्में भी मुख्य प्राणकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन करनेके लिये अन्य सब तत्त्वोंसे और इन्द्रियोंसे मुख्य प्राणको अलग बताया है (प्र० उ० २।२, ३)। इस प्रकार श्रुतियोंमें मुख्य प्राणका इन्द्रियोंसे भेद बताया जानेके कारण भी यही सिद्ध होता है कि मुख्य प्राण इन सबसे भिन्न है। सम्बन्ध - इसके सिवा- वैलक्षण्याच्च ॥ २ । ४ । १९ ॥ वैलक्षण्यात् = परस्पर विलक्षणता होनेके कारण; च = भी (यही सिद्ध होता है कि मुख्य प्राणसे इन्द्रियाँ भिन्न पदार्थ हैं)। व्याख्या-सब इन्द्रियाँ और अन्तःकरण सुषुप्तिके समय विलीन हो जाते हैं, उस समय भी मुख्य प्राण जागता रहता है, उसपर निद्राका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यही इन सबकी अपेक्षा मुख्य प्राणकी विलक्षणता है; इस कारण भी यही सिद्ध होता है कि मुख्य प्राणसे इन्द्रियाँ भिन्न हैं। न तो इन्द्रियाँ प्राणका कार्य या वृत्तियाँ हैं और न मुख्य प्राण ही इन्द्रिय है, इन्द्रियोंको गौणरूपसे ही 'प्राण' नाम दिया गया है। सम्बन्ध - तेज आदि तत्त्वोंकी रचना करके परमात्माने जीवसहित उनमें प्रवेश करनेके पश्चात् नाम-रूपात्मक जगत्‌का विस्तार किया-यह