भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 363, कुल 486 में से

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पृष्ठ 363

३६० वेदान्त-दर्शन [ पाद ३ परब्रह्म परमात्माको प्राप्त हो जाता है। (बृह० उ० ४।४।६१ तथा क० उ० २।३।१४२) प्रारब्धभोगके अन्तमें उसके स्थूल, सूक्ष्म और कारण- शरीरोंके तत्त्व उसी प्रकार अपने-अपने कारण-तत्त्वोंमें विलीन हो जाते हैं, जिस प्रकार मृत्युके बाद प्रत्येक मनुष्यके स्थूल-शरीरके तत्त्व पाँचों भूतोंमें विलीन हो जाते हैं (मु० उ० ३।२।७)।३ सम्बन्ध—ऐसा होनेमें क्या प्रमाण है? इस जिज्ञासापर कहते हैं— परेण च शब्दस्य ताद्विध्यं भूयस्त्वात्त्वनुबन्धः ॥ ३।३।५२ ॥ परेण=बादवाले मन्त्रोंसे (यह सिद्ध होता है); च=तथा; शब्दस्य=उसमें कहे हुए शब्दसमुदायका; ताद्विध्यम्=उसी प्रकारका भाव है; तु=किंतु अन्य साधकोंके; भूयस्त्वात्=दूसरे भावोंकी अधिकतासे; अनुबन्धः=सूक्ष्म और कारण-शरीरसे सम्बन्ध रहता है। (इस कारण वे ब्रह्मलोकमें जाते हैं)। व्याख्या—मुण्डकोपनिषद्में पहले तो यह बात कही गयी है कि— वेदान्तविज्ञानसुनिश्चितार्थाः संन्यासयोगाद्यतयः शुद्धसत्त्वाः। ते ब्रह्मलोकेषु परान्तकाले परामृताः परिमुच्यन्ति सर्वे॥ 'वेदान्तशास्त्रके ज्ञानद्वारा जिन्होंने वेदान्तके अर्थभूत परब्रह्म परमात्माके स्वरूपका निश्चय कर लिया है, कर्मफलरूप समस्त भोगोंके त्यागरूप योगसे जिनका अन्तःकरण शुद्ध हो गया है, वे सब साधक मरणकालमें ब्रह्मलोकोंमें जाकर परम अमृतस्वरूप होकर सर्वथा मुक्त हो जाते हैं' (३।२।६)। इसके बाद अगले मन्त्रमें जिनको इस शरीरका नाश होनेसे पहले ब्रह्मकी प्राप्ति हो जाती है, उनके विषयमें इस प्रकार कहा है— १-यह मन्त्र सूत्र ३।३।३० की व्याख्यामें आया है। २-यह मन्त्र सूत्र ३।४।५२ की टिप्पणीमें आया है। ३-यह मन्त्र अगले सूत्रकी व्याख्यामें है।

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