भारतकोश
वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya

भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished486 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 486 में से

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५८ वेदान्त-दर्शन [ पाद २ बताया तथा वही प्राणरूपसे सबको सत्ता-स्फूर्ति देनेवाला है; इस प्रकार संकेतसे ब्रह्मका परिचय कराया। उसके बाद गार्हपत्य अग्निने प्रकट होकर कहा— 'सूर्यमें जो यह पुरुष दीखता है, वह मैं हूँ; जो उपासक इस प्रकार जानकर उपासना करता है, वह पापोंका नाश करके अच्छे लोकोंका अधिकारी होता है तथा पूर्ण आयुष्मन् और उज्ज्वल जीवनसे युक्त होता है। उसका वंश कभी नष्ट नहीं होता।' इसके बाद 'अन्वाहार्यपचन' अग्निने प्रकट होकर कहा, 'चन्द्रमामें जो यह पुरुष दिखायी देता है, वह मैं हूँ। जो मनुष्य इस रहस्यको समझकर उपासना करता है, वह अच्छे लोकोंका अधिकारी होता है।' इत्यादि। तत्पश्चात् आहवनीय अग्निने प्रकट होकर कहा, 'बिजलीमें जो यह पुरुष दीखता है, वह मैं हूँ।' इसको जानकर उपासना करनेका फल भी उन्होंने दूसरी अग्नियोंकी भाँति ही बतलाया। तदनन्तर सब अग्नियोंने एक साथ कहा, 'हे उपकोसल ! हमने तुमको हमारी विद्या (अग्नि-विद्या) और आत्म- विद्या दोनों ही बतलायी हैं। आचार्य तुमको इनका मार्ग दिखलावेंगे।' इतनेमें ही उसके गुरु सत्यकाम आ गये। आचार्यने पूछा, 'सौम्य ! तेरा मुख ब्रह्मवेत्ताकी भाँति चमकता है, तुझे किसने उपदेश दिया है!' उपकोसलने अग्नियोंकी ओर संकेत किया। आचार्यने पूछा, 'इन्होंने तुझे क्या बतलाया है?' तब उपकोसलने अग्नियोंसे सुनी हुई सब बातें बता दीं। तत्पश्चात् आचार्यने कहा, 'हे सौम्य ! इन्होंने तुझे केवल उत्तम लोकप्राप्तिके साधनका उपदेश दिया है, अब मैं तुझे वह उपदेश देता हूँ, जिसे जान लेनेवालेको पाप उसी प्रकार स्पर्श नहीं कर सकते, जैसे कमलके पत्तेको जल।' उपकोसलने कहा, 'भगवन्! बतलानेकी कृपा कीजिये।' इसके उत्तरमें आचार्यने कहा, 'य एषोऽक्षिणि पुरुषो दृश्यत एष आत्मेति होवाचैतदमृतमभयमेतद्ब्रह्मेति' अर्थात् 'जो नेत्रमें यह पुरुष दिखलायी देता है, यही आत्मा है, यही अमृत है, यही अभय है और ब्रह्म है।' उसके बाद उसीको 'संयद्वाम्', 'वामनी' और 'भामनी' बतलाकर अन्तमें इन विद्याओंका फल अर्चिर्मागसे ब्रह्मको प्राप्त होना बताया है।