वेदान्त दर्शन: ब्रह्मसूत्र (शाङ्करभाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Vedanta Darshana: Brahma Sutra with Shankara Bhashya
भगवान् बादरायण व्यास व आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 85, कुल 486 में से
संदर्भ में पढ़ें८२ वेदान्त-दर्शन [ पाद ३ बताया। फिर सुखरूपसे भूमाको अर्थात् सबसे महान् परब्रह्म परमात्माको बतलाकर प्रकरणका उपसंहार किया। इस प्रकार प्राणशब्दवाच्य जीवात्मासे अधिक (बड़ा) भूमाको बताये जानेके कारण इस प्रकरणमें 'भूमा' शब्द सत्य ज्ञानानन्दस्वरूप सच्चिदानन्दघन परब्रह्म परमात्माका ही वाचक है। प्राण, जीवात्मा अथवा प्रकृतिका वाचक नहीं। सम्बन्ध—इतना ही नहीं, अपितु— धर्मोपपत्तेश्च ॥ १। ३ । ९ ॥ धर्मोपपत्तेः = (उक्त प्रकरणमें) जो भूमाके धर्म बतलाये गये हैं, वे भी ब्रह्ममें ही सुसंगत हो सकते हैं, इसलिये; च = भी; (यहाँ 'भूमा' ब्रह्म ही है।) व्याख्या—पूर्वोक्त प्रकरणमें उस भूमाके धर्मोंका इस प्रकार वर्णन किया गया है—'यत्र नान्यत् पश्यति नान्यच्छृणोति नान्यद् विजानाति स भूमाथ यत्रान्यत् पश्यत्यन्यच्छृणोत्यन्यद् विजानाति तदल्पं यो वै भूमा तदमृतमथ यदल्पं तन्मर्त्यम्। स भगवः कस्मिन् प्रतिष्ठित इति स्वे महिम्नि।' (छा० उ० ७।२४।१) अर्थात् 'जहाँ पहुँचकर न अन्य किसीको देखता है, न अन्यको सुनता है, न अन्यको जानता है, वह भूमा है। जहाँ अन्यको देखता, सुनता और जानता है, वह अल्प है। जो भूमा है, वही अमृत है और जो अल्प है, वह नाशवान् है।' इसपर नारदने पूछा—'भगवन् ! वह भूमा किसमें प्रतिष्ठित है?' उत्तरमें सनत्कुमारने कहा—'अपनी महिमामें।' आगे चलकर फिर कहा है कि 'धन, सम्पत्ति, मकान आदि जो महिमाके नामसे प्रसिद्ध हैं, ऐसी महिमामें वह भूमा प्रतिष्ठित नहीं है, किंतु वह नीचे, ऊपर, आगे, पीछे, दायें और बायें है तथा वही यह सब कुछ है।' इसके बाद उस भूमाको ही आत्माके नामसे कहा है और यह भी बताया है कि 'आत्मा ही नीचे, ऊपर, आगे, पीछे, दायें और बायें है तथा वही सब कुछ है। जो इस प्रकार देखने, मानने तथा विशेषरूपसे जाननेवाला है, वह आत्मामें ही क्रीडा करनेवाला, आत्मामें ही रतिवाला, आत्मामें ही जुड़ा हुआ तथा आत्मामें ही आनन्दवाला है।' इत्यादि।