भारतकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished810 पृष्ठ

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(८) विषय पृष्ठ-संख्या ११- विष्णु आदि देवताओंद्वारा गणेशकी अग्रपूजा, पार्वतीकृत विशेषोपचारसहित गणेशपूजन, विष्णुकृत गणेशस्तवन और 'संसारमोहन' नामक कवचका वर्णन .................... ३४१ १२- पार्वतीको देवताओंद्वारा कार्तिकेयका समाचार प्राप्त होना, शिवजीका कृत्तिकाओंके पास दूतोंको भेजना, वहाँ कार्तिकेय और नन्दीका संवाद ................................. ३४५ १३- कार्तिकेयका नन्दिकेश्वरके साथ कैलासपर आगमन, स्वागत, सभामें जाकर विष्णु आदि देवोंको नमस्कार करना और शुभाशीर्वाद पाना ........................... ३४७ १४- कार्तिकेयका अभिषेक तथा देवताओंद्वारा उन्हें उपहार-प्रदान ............................. ३५० १५- गणेशके शिरश्छेदनके वर्णनके प्रसङ्गमें शंकरद्वारा सूर्यका मारा जाना, कश्यपका शिवको शाप देना, सूर्यका जीवित होना और माली-सुमालीकी रोगनिवृत्ति ........ ३५१ १६- ब्रह्माद्वारा माली-सुमालीको सूर्यके कवच और स्तोत्रकी प्राप्ति तथा सूर्यकी कृपासे उन दोनोंका नीरोग होना ..................... ३५२ १७- भगवान् नारायणके निवेदित पुष्पकी अवहेलनासे इन्द्रका श्रीभ्रष्ट होना, पुनः बृहस्पतिके साथ ब्रह्माके पास जाना, ब्रह्माद्वारा दिये गये नारायणस्तोत्र, कवच और मन्त्रके जपसे पुनः श्री प्राप्त करना ........... ३५४ १८- श्रीहरिका इन्द्रको लक्ष्मी-कवच तथा लक्ष्मी-स्तोत्र प्रदान करना ................ ३५६ १९- देवताओंके स्तवन करनेपर महालक्ष्मीका प्रकट होकर देवों और मुनियोंके समक्ष अपने निवास-योग्य स्थानका वर्णन करना........ ३५८ २०- गणेशके एकदन्त-वर्णन-प्रसङ्गमें जमदग्निके आश्रमपर कार्तवीर्यका स्वागत-सत्कार, कार्तवीर्यका बलपूर्वक कामधेनुको हरण करनेकी इच्छा प्रकट करना, कामधेनुद्वारा उत्पन्न की हुई सेनाके साथ कार्तवीर्यकी सेनाका युद्ध ................................. ३६० २१- जमदग्नि और कार्तवीर्यका युद्ध तथा ब्रह्माद्वारा उसका निवारण .................... ३६३ २२- जमदग्नि-कार्तवीर्य-युद्ध, कार्तवीर्यद्वारा दत्तात्रेयदत्त शक्तिके प्रहारसे जमदग्निका वध, विषय पृष्ठ-संख्या रेणुकाका विलाप, परशुरामका आना और क्षत्रियवधकी प्रतिज्ञा करना, भृगुका आकर उन्हें सान्त्वना देना ..................... ३६५ २३- रेणुका-भृगु-संवाद, रेणुकाका पतिके साथ सती होना, परशुरामका पिताकी अन्त्येष्टि क्रिया करके ब्रह्माके पास जाना और अपनी प्रतिज्ञा सुनाना, ब्रह्माका उन्हें शिवजीके पास भेजना ........................ ३६७ २४- परशुरामका शिवलोकमें जाकर शिवजीके दर्शन करके उनकी स्तुति करना ........... ३७० २५- परशुरामका शिवजीसे अपना अभिप्राय प्रकट करना, उसे सुनकर भद्रकालीका कुपित होना, परशुरामका रोने लगना, शिवजीका कृपा करके उन्हें नाना प्रकारके दिव्यास्त्र एवं शस्त्रास्त्र प्रदान करना ........ ३७३ २६- शिवजीका प्रसन्न होकर परशुरामको त्रैलोक्यविजय नामक कवच प्रदान करना .... ३७४ २७- शिवजीका परशुरामको मन्त्र, ध्यान, पूजाविधि और स्तोत्र प्रदान करना ........ ३७७ २८- पुष्करमें जाकर परशुरामका तपस्या करना, श्रीकृष्णद्वारा वर-प्राप्ति, आश्रमपर मित्रोंके साथ उनका विजय-यात्रा करना और शुभ शकुनोंका प्रकट होना, नर्मदापर रात्रिमें परशुरामको स्वप्नमें शुभ शकुनोंका दिखलायी देना ................................. ३८२ २९- परशुरामका कार्तवीर्यके पास दूत भेजना, दूतकी बात सुनकर राजाका युद्धके लिये उद्यत होना और रानी मनोरमासे स्वप्रदृष्ट अपशकुनका वर्णन करना, रानीका उन्हें परशुरामकी शरण ग्रहण करनेको कहना, परंतु राजाका मनोरमाको समझाकर युद्ध- यात्राके लिये उद्यत होना ..................... ३८५ ३०- राजाको युद्धके लिये उद्यत देख मनोरमाका योगद्वारा शरीर-त्याग, राजाका विलाप और आकाशवाणी सुनकर उसकी अन्त्येष्टि- क्रिया करना, युद्धयात्राके समय नाना प्रकारके अपशकुन देखना, कार्तवीर्य और परशुरामका युद्ध तथा कार्तवीर्यका वध, नारायणद्वारा शिव-कवचका वर्णन ........ ३८८ ३१- मत्स्यराजके वधके पश्चात् अनेकों राजाओंका आना और परशुरामद्वारा मारा जाना, पुनः