भारतकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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(७) विषय पृष्ठ-संख्या ४०- गोलोक एवं श्रीकृष्णकी उत्कृष्टता, कालमान एवं विभिन्न प्रलयोंका निरूपण, चौदह मनुओंका परिचय, ब्रह्मासे लेकर प्रकृतितकके श्रीकृष्णमें लय होनेका वर्णन, शिवका मृत्युञ्जयत्व, मूलप्रकृतिसे महाविष्णुका प्रादुर्भाव, सुयज्ञको विप्रचरणोदकका महत्त्व तथा राधाका मन्त्र बताकर सुतपाका जाना, पुष्करमें राजाकी दुष्कर तपस्या तथा राधामन्त्रके जपसे सुयज्ञका श्रीराधाकी कृपासे गोलोकमें जाना और श्रीकृष्णका दर्शन एवं कृपाप्रसाद प्राप्त करना............................................ २८१ ४१- श्रीराधाके ध्यान, षोडशोपचार-पूजन, परिचारिकापूजन, परिहारस्तवन, पूजन-महिमा तथा स्तुति एवं उसके माहात्म्यका वर्णन .... २८९ ४२- श्रीजगन्मङ्गल-राधाकवच तथा उसकी महिमा .................................................. २९५ ४३- दुर्गाजीके सोलह नामोंकी व्याख्या, दुर्गाकी उत्पत्ति तथा उनके पूजनकी परम्पराका संक्षिप्त वर्णन ....................................... २९९ ४४- सुरथ और समाधि वैश्यका मेधसके आश्रमपर जाना, मुनिका दुर्गाकी महिमा एवं उनकी आराधना-विधिको उपदेश देना तथा दुर्गाकी आराधनासे उन दोनोंके अभीष्ट मनोरथकी पूर्ति .......................... ३०१ ४५- सुरथ और समाधिपर देवीकी कृपा और वरदान, देवीकी पूजाका विधान, ध्यान, प्रतिमाकी स्थापना, परिहारस्तुति, शङ्खमें तीर्थोका आवाहन तथा देवीके षोडशोपचार- पूजनका क्रम ........................................ ३०३ ४६- देवीके बोधन, आवाहन, पूजन और विसर्जनके नक्षत्र, इन सबकी महिमा, राजाको देवीका दर्शन एवं उत्तम ज्ञानका उपदेश देना .......................................... ३०९ ४७- दुर्गाजीका दुर्गनाशनस्तोत्र तथा प्रकृतिकवच या ब्रह्माण्डमोहनकवच एवं उसका माहात्म्य ३१० (गणपतिखण्ड) १- नारदजीकी नारायणसे गणेशचरितके विषयमें जिज्ञासा, नारायणद्वारा शिव- पार्वतीके विवाह तथा स्कन्दकी उत्पत्तिका वर्णन, पार्वतीकी महादेवजीसे पुत्रोत्पत्तिके लिये प्रार्थना, शिवजीका उन्हें पुण्यक- व्रतके लिये प्रेरित करना ........................ ३१५ विषय पृष्ठ-संख्या २- शिवजीद्वारा पार्वतीसे पुण्यक-व्रतकी सामग्री, विधि तथा फलका वर्णन ........................ ३१७ ३- पुण्यक-व्रतकी माहात्म्य-कथाका कथन ... ३१९ ४- पार्वतीजीका व्रतारम्भके लिये उद्योग, ब्रह्मादि देवों तथा ऋषि आदिका आगमन, शिवजीद्वारा उनका सत्कार तथा श्रीविष्णुसे पुण्यक-व्रतके विषयमें प्रश्न, श्रीविष्णुका व्रतके माहात्म्य तथा गणेशकी उत्पत्तिका वर्णन करना .......................................... ३२० ५- पार्वतीद्वारा व्रतारम्भ, व्रत-समाप्तिमें पुरोहितद्वारा शिवको दक्षिणारूपमें माँगे जानेपर पार्वतीका मूर्च्छित होना, शिवजी तथा देवताओं और मुनियोंका उन्हें समझाना, पार्वतीका विषाद, नारायणका आगमन और उनके द्वारा पतिके बदले गोमूल्य देकर पार्वतीको व्रत समाप्त करनेका आदेश, पुरोहितद्वारा उसका अस्वीकार, एक अद्भुत तेजका आविर्भाव और देवताओं, मुनियों तथा पार्वतीद्वारा उसका स्तवन ...... ३२४ ६- पार्वतीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए श्रीकृष्णका पार्वतीको अपने रूपके दर्शन कराना, वर प्रदान करना और बालकरूपसे उनकी शय्यापर खेलना .................................... ३३० ७- श्रीहरिके अन्तर्धान हो जानेपर शिव- पार्वतीद्वारा ब्राह्मणकी खोज, आकाशवाणीके सूचित करनेपर पार्वतीका महलमें जाकर पुत्रको देखना और शिवजीको बुलाकर दिखाना, शिव-पार्वतीका पुत्रको गोदमें लेकर आनन्द मनाना ........................... ३३४ ८- शिव, पार्वती तथा देवताओंद्वारा अनेक प्रकारका दान दिया जाना, बालकको देवताओं एवं देवियोंका शुभाशीर्वाद और इस मङ्गलाध्यायके श्रवणका फल .......... ३३६ ९- गणेशको देखनेके लिये शनैश्चरका आना और पार्वतीके पूछनेपर अपने द्वारा किसी वस्तुके न देखनेका कारण बताना ......... ३३८ १०- पार्वतीके कहनेसे शनैश्चरका गणेशपर दृष्टिपात करना, गणेशके सिरका कटकर गोलोकमें चला जाना, पार्वतीकी मूर्च्छा, श्रीहरिका आगमन और गणेशके धड़पर हस्तीका सिर जोड़कर जीवित करना, फिर पार्वतीको होशमें लाकर बालकको आशीर्वाद देना, पार्वतीद्वारा शनैश्चरको शाप ....................... ३३९