भारतकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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( ६ )

विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
११- तुलसीके कथा-प्रसङ्गमें राजा वृषध्वजका चरित्र-वर्णन१५६द्वारा धर्मराजको प्रणाम-निवेदन२०१
१२- वेदवतीकी कथा, इसी प्रसङ्गमें भगवान् रामके चरित्रका एक अंश-कथन, भगवती सीता तथा द्रौपदीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त१५९२५- नरक-कुण्डों और उनमें जानेवाले पापियों तथा पापोंका वर्णन२०६
१३- भगवती तुलसीके प्रादुर्भावका प्रसङ्ग१६२२६- पञ्चदेवोपासकोंके नरकमें न जानेका कथन तथा छियासी प्रकारके नरक-कुण्डोंका विशद परिचय२१५
१४- तुलसीको स्वप्नमें शङ्खचूड़के दर्शन, शङ्खचूड़ तथा तुलसीके विवाहके लिये ब्रह्माजीका दोनोंको आदेश, तुलसीके साथ शङ्खचूड़का गान्धर्व-विवाह तथा देवताओंके प्रति उसके पूर्वजन्मका स्पष्टीकरण१६५२७- भगवान् श्रीकृष्णके स्वरूप, महत्त्व और गुणोंकी अनिर्वचनीयता२२१
१५- पुष्पदन्तका दूत बनकर शङ्खचूड़के पास जाना और शङ्खचूड़के द्वारा तुलसीके प्रति ज्ञानोपदेश१७१२८- भगवती महालक्ष्मीके प्राकट्य तथा विभिन्न व्यक्तियोंसे उनके पूजित होनेका तथा दुर्वासाके शापसे महालक्ष्मीके देवलोक-त्याग और इन्द्रके दुःखी होकर बृहस्पतिके पास जानेका वर्णन२२६
१६- शङ्खचूड़का पुष्पभद्रा नदीके तटपर जाना, वहाँ भगवान् शंकरके दर्शन तथा उनसे विशद वार्तालाप१७४२९- भगवती लक्ष्मीका समुद्रसे प्रकट होना और इन्द्रके द्वारा महालक्ष्मीके ध्यान तथा स्तवन किये जाने और पुनः अधिकार प्राप्त किये जानेका वर्णन२३६
१७- भगवान् शंकरऔर शङ्खचूड़के पक्षोंमें युद्ध, भद्रकालीका घोर युद्ध और आकाशवाणी सुनकर कालीका शङ्खचूड़पर पाशुपतास्त्र न चलाना१७८३०- भगवती स्वाहा तथा भगवती स्वधाका उपाख्यान, उनके ध्यान, पूजा-विधान तथा स्तोत्रोंका वर्णन२४४
१८- भगवान् शंकर और शङ्खचूड़का युद्ध, शंकरके त्रिशूलसे शङ्खचूड़का भस्म होना तथा सुदामा गोपके स्वरूपमें उसका विमानद्वारा गोलोक पधारना१८१३१- भगवती दक्षिणाके प्राकट्यका प्रसङ्ग, उनका ध्यान, पूजा-विधान तथा स्तोत्र-वर्णन एवं चरित्र-श्रवणकी फल-श्रुति२४९
१९- शङ्खचूड़-वेषधारी श्रीहरिद्वारा तुलसीका पातिव्रत्यभङ्ग, शङ्खचूड़का पुनः गोलोक जाना, तुलसी और श्रीहरिका वृक्ष एवं शालग्रामपाषाणके रूपमें भारतवर्षमें रहना तथा तुलसीमहिमा, शालग्रामके विभिन्न लक्षण तथा महत्त्वका वर्णन१८२३२- देवी षष्ठीके ध्यान, पूजन, स्तोत्र तथा विशद महिमाका वर्णन२५३
२०- तुलसी-पूजन, ध्यान, नामाष्टक तथा तुलसी-स्तवनका वर्णन१८७३३- भगवती मङ्गलचण्डी और मनसादेवीका उपाख्यान२५७
२१- सावित्री देवीकी पूजा-स्तुतिका विधान१९०३४- आदिगौ सुरभीदेवीका उपाख्यान२६६
२२- राजा अश्वपतिद्वारा सावित्रीकी उपासना तथा फलस्वरूप सावित्री नामक कन्याकी उत्पत्ति, सत्यवान्के साथ सावित्रीका विवाह, सत्यवान्की मृत्यु, सावित्री और यमराजका संवाद१९५३५- नारद-नारायण-संवादमें पार्वतीजीके पूछनेपर महादेवजीके द्वारा श्रीराधाके प्रादुर्भाव एवं महत्त्व आदिका वर्णन२६८
२३- सावित्री-धर्मराजके प्रश्नोत्तर, सावित्रीको वरदान१९८३६- श्रीराधा और श्रीकृष्णके चरित्र तथा श्रीराधाकी पूजा-परम्पराका अत्यन्त संक्षिप्त परिचय२७१
२४- सावित्री-धर्मराजके प्रश्नोत्तर तथा सावित्रीके३७- राजा सुयज्ञकी यज्ञशीलता और उन्हें ब्राह्मणके शापकी प्राप्ति, ऋषियोंद्वारा ब्राह्मणको क्षमाके लिये प्रेरित करते हुए कृतघ्नोंके भेद तथा विभिन्न पापोंके फलका प्रतिपादन२७२
३८- शेष कृतघ्नोंके कर्मफलोंका विभिन्न मुनियोंद्वारा प्रतिपादन२७७
३९- सुतपाके द्वारा सुयज्ञको शिवप्रदत्त परम दुर्लभ महाज्ञानका उपदेश२७९