ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११६ संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण
ही श्रीराधाके रोमकूपोंसे बहुत-सी गोपकन्याएँ प्रकट हुईं। वे सभी राधाके समान ही जान पड़ती थीं।
उन मधुरभाषिणी कन्याओंको राधाने अपनी दासी बना लिया। वे रत्नमय भूषणोंसे विभूषित थीं। उनका नया तारुण्य सदा बना रहता था। परम पुरुषके शापसे वे भी सदाके लिये सन्तानहीना हो गयी थीं।
विप्र! इतनेमें श्रीकृष्णके शरीरसे देवी दुर्गाका सहसा आविर्भाव हुआ। ये दुर्गा सनातनी एवं भगवान् विष्णुकी माया हैं। इन्हें नारायणी, ईशानी और सर्वशक्तिस्वरूपिणी कहा जाता है। ये परमात्मा श्रीकृष्णकी बुद्धिकी अधिष्ठात्री देवी हैं। सम्पूर्ण देवियाँ इन्हींसे प्रकट होती हैं। अतएव इन्हें देवियोंकी बीजस्वरूपा मूलप्रकृति एवं ईश्वरी कहते हैं। ये परिपूर्णतमा देवी तेजःस्वरूपा तथा त्रिगुणात्मिका हैं। तपाये हुए सुवर्णके समान इनका वर्ण है। प्रभा ऐसी है, मानो करोड़ों सूर्य चमक रहे हों। इनके मुखपर मन्द-मन्द मुस्कराहट छायी रहती है। ये हजारों भुजाओंसे सुशोभित हैं। अनेक प्रकारके अस्त्र और शस्त्रोंको हाथमें लिये रहती हैं। इनके तीन नेत्र हैं। ये विशुद्ध वस्त्र धारण किये हुई हैं। रत्ननिर्मित भूषण इनकी शोभा बढ़ा रहे हैं। सम्पूर्ण स्त्रियाँ इनके अंशकी कलासे उत्पन्न हैं। इनकी माया जगत्के समस्त प्राणियोंको मोहित करनेमें समर्थ है। सकामभावसे उपासना करनेवाले गृहस्थोंको ये सम्पूर्ण ऐश्वर्य प्रदान करती हैं। इनकी कृपासे भगवान् श्रीकृष्णमें भक्ति उत्पन्न होती है। विष्णुके उपासकोंके लिये ये भगवती वैष्णवी (लक्ष्मी) हैं। मुमुक्षुजनोंको मुक्ति प्रदान करना और सुख चाहनेवालोंको सुखी बनाना इनका स्वभाव है। स्वर्गमें ‘स्वर्गलक्ष्मी’ और गृहस्थोंके घर ‘गृहलक्ष्मी’ के रूपमें ये विराजती हैं। तपस्वियोंके पास तपस्यारूपसे, राजाओंके यहाँ श्रीरूपसे, अग्निमें दाहिकारूपसे, सूर्यमें प्रभारूपसे तथा चन्द्रमा एवं कमलमें शोभारूपसे इन्हींकी शक्ति शोभा पा रही है। सर्वशक्तिस्वरूपा ये देवी परमात्मा श्रीकृष्णमें विराजमान रहती हैं। इनका सहयोग पाकर आत्मामें कुछ करनेकी योग्यता प्राप्त होती है। इन्हींसे जगत् शक्तिमान् माना जाता है। इनके बिना प्राणी जीते हुए भी मृतकके समान हैं।
नारद! ये सनातनी देवी संसाररूपी वृक्षके लिये बीजस्वरूपा हैं। स्थिति, बुद्धि, फल, क्षुधा, पिपासा, दया, श्रद्धा, निद्रा, तन्द्रा, क्षमा, मति, शान्ति, लज्जा, तुष्टि, पुष्टि, भ्रान्ति और कान्ति आदि सभी इन दुर्गाके ही रूप हैं।
ये देवी सर्वेश श्रीकृष्णकी स्तुति करके