ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| १२४ | संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण |
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स्वयं बृहती छन्द है। माता शारदा अधिष्ठात्री देवी हैं। अखिल तत्त्वपरिज्ञानपूर्वक सम्पूर्ण अर्थके साधन तथा समस्त कविताओंके प्रणयन एवं विवेचनमें इसका प्रयोग किया जाता है।
श्रीं-ह्रीं-स्वरूपिणी भगवती सरस्वतीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सब ओरसे मेरे सिरकी रक्षा करें। ॐ श्रीं वाग्देवताके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सदा मेरे ललाटकी रक्षा करें। ॐ ह्रीं भगवती सरस्वतीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे निरन्तर कानोंकी रक्षा करें। ॐ श्रीं-ह्रीं भारतीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सदा दोनों नेत्रोंकी रक्षा करें। ऐं-ह्रीं-स्वरूपिणी वाग्वादिनीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सब ओरसे मेरी नासिकाकी रक्षा करें। ॐ ह्रीं विद्याकी अधिष्ठात्री देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे होठकी रक्षा करें। ॐ श्रीं-ह्रीं भगवती ब्राह्मीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे दन्त-पङ्क्तिकी निरन्तर रक्षा करें। 'ऐं' यह देवी सरस्वतीका एकाक्षर-मन्त्र मेरे कण्ठकी सदा रक्षा करे। ॐ श्रीं ह्रीं मेरे गलेकी तथा श्रीं मेरे कंधोंकी सदा रक्षा करे। ॐ श्रीं विद्याकी अधिष्ठात्री देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सदा वक्षःस्थलकी रक्षा करें। ॐ ह्रीं विद्यास्वरूपा देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे मेरी नाभिकी रक्षा करें। ॐ ह्रीं-क्लीं-स्वरूपिणी देवी वाणीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सदा मेरे हाथोंकी रक्षा करें। ॐ-स्वरूपिणी भगवती सर्ववर्णात्मिकाके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे दोनों पैरोंको सुरक्षित रखें। ॐ वाग्की अधिष्ठात्री देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे मेरे सर्वस्वकी रक्षा करें। सबके कण्ठमें निवास करनेवाली ॐस्वरूपा देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे पूर्व दिशामें सदा मेरी रक्षा करें। जीभके अग्रभागपर विराजनेवाली ॐह्रीं-स्वरूपिणी देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे अग्निकोणमें रक्षा करें।
'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सरस्वत्यै बुधजनन्यै स्वाहा।'
इसको मन्त्रराज कहते हैं। यह इसी रूपमें सदा विराजमान रहता है। यह निरन्तर मेरे दक्षिण भागकी रक्षा करे। 'ऐं ह्रीं श्रीं'—यह त्र्यक्षरमन्त्र नैर्ऋत्यकोणमें सदा मेरी रक्षा करे। कविकी जिह्वाके अग्रभागपर रहनेवाली ॐ-स्वरूपिणी देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे पश्चिम दिशामें मेरी रक्षा करें। ॐ-स्वरूपिणी भगवती सर्वाम्बिकाके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे वायव्यकोणमें सदा मेरी रक्षा करें। गद्य-पद्यमें निवास करनेवाली ॐऐं श्रीमयी देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे उत्तर दिशामें मेरी रक्षा करें। सम्पूर्ण शास्त्रोंमें विराजनेवाली ऐं-स्वरूपिणी देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे ईशानकोणमें सदा मेरी रक्षा करें। ॐ ह्रीं-स्वरूपिणी सर्वपूजिता देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे ऊपरसे मेरी रक्षा करें। पुस्तकमें निवास करनेवाली ऐं-ह्रीं-स्वरूपिणी देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे मेरे निम्नभागकी रक्षा करें। ॐ-स्वरूपिणी ग्रन्थबीजस्वरूपा देवीके लिये श्रद्धाकी आहुति दी जाती है, वे सब ओरसे मेरी रक्षा करें।
विप्र! यह सरस्वती-कवच तुम्हें सुना दिया। असंख्य ब्रह्ममन्त्रोंका यह मूर्तिमान् विग्रह है। ब्रह्मस्वरूप इस कवचको 'विश्वजय' कहते हैं। प्राचीन समयकी बात है—गन्धमादन पर्वतपर पिता धर्मदेवके मुखसे मुझे इसे सुननेका सुअवसर प्राप्त हुआ था। तुम मेरे परम प्रिय हो। अतएव तुमसे मैंने कहा है। तुम्हें अन्य किसीके सामने इसकी चर्चा नहीं करनी चाहिये। विद्वान् पुरुषको चाहिये कि वस्त्र, चन्दन और अलंकार आदि सामानोंसे विधिपूर्वक गुरुकी पूजा करके दण्डकी