ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished810 पृष्ठ
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( १६ )
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ९१- बाणका यादवी सेनाके साथ युद्ध, बाणका धराशायी होना, शंकरजीका बाणको उठाकर श्रीकृष्णके चरणोंमें डाल देना, श्रीकृष्णद्वारा बाणको जीवन-दान, बाणका श्रीकृष्णको बहुत-से दहेजके साथ अपनी कन्या समर्पित करना, श्रीकृष्णका पौत्र और पौत्रवधूके साथ द्वारकाको लौट जाना और द्वारकामें महोत्सव ................................................ | ७७४ | पूछनेपर श्रीकृष्णद्वारा अपना तथा राधाका रहस्योद्घाटन ........................................ | ७८६ |
| ९२- शृगालोपाख्यान ..................................... | ७७७ | ९७- श्रीकृष्णका राधाके साथ विभिन्न स्थलोंमें विहार करके पुनः गोकुलमें जाना, वहाँ उनका स्वागत-सत्कार, यशोदाका राधासहित श्रीकृष्णको महलमें ले जाना और मङ्गल-महोत्सव करना ........................ | ७८९ |
| ९३- गणेशके अग्रपूज्यत्व-वर्णनके प्रसङ्गमें राधाद्वारा गणेशकी अग्रपूजाका कथन ....... | ७७९ | ९८- श्रीकृष्णद्वारा नन्दको ज्ञानोपदेश और राधा-कलावती आदि गोपियोंका गोलोक-गमन ..... | ७९० |
| ९४- गणेशकृत राधा-प्रशंसा, पार्वती-राधा-सम्भाषण, पार्वतीके आदेशसे सखियोंद्वारा राधाका शृङ्गार और उनकी विचित्र झाँकी; ब्रह्मा, शिव, अनन्त आदिके द्वारा राधाकी स्तुति ..................................................... | ७८० | ९९- श्रीकृष्णके गोलोक-गमनका वर्णन ........... | ७९१ |
| ९५- वसुदेवजीका शंकरजीसे भव-तरणका उपाय पूछना, शंकरजीका उन्हें ज्ञानोपदेश देकर राजसूय-यज्ञ करनेका आदेश देना, वसुदेवजीद्वारा राजसूय-यज्ञका अनुष्ठान और यज्ञान्तमें सर्वस्व दक्षिणामें देकर उनका द्वारकाको लौटना ..... | ७८५ | १००- नारायणके आदेशसे नारदका विवाहके लिये उद्यत हो ब्रह्मलोकमें जाना, ब्रह्माका दल-बलके साथ राजा सृंजयके पास आना, सृंजय-कन्या और नारदका विवाह, सनत्कुमारद्वारा नारदको श्रीकृष्ण-मन्त्रोपदेश, महादेवजीका उन्हें श्रीकृष्णका ध्यान और जप-विधि बतलाना, तपके अन्तमें नारदका शरीर त्यागकर श्रीहरिके पादपद्ममें लीन होना................................ | ७९६ |
| ९६- राधा और श्रीकृष्णका पुनः मिलाप, राधाके | १०१- पुराणोंके लक्षण और उनकी श्लोक-संख्याका निरूपण, ब्रह्मवैवर्तपुराणके पठन-श्रवणके माहात्म्यका वर्णन करके सूतजीका सिद्धाश्रमको प्रयाण ................................ | ७९८ |
इकरंगे चित्र
| १- भगवती लक्ष्मी (कथा-प्रसङ्ग पृष्ठ २३९) ... ३९ | ४- सुतपा ब्राह्मण (कथा-प्रसङ्ग पृष्ठ २८६) ..... ८६ |
| २- भगवती सरस्वती (कथा-प्रसङ्ग पृष्ठ १२१)...... ३९ | ५- भगवती गङ्गा (कथा-प्रसङ्ग पृष्ठ १५६) ... १५५ |
| ३- शिशु नारद................................................ ८६ | ६- श्रीतुलसी (कथा-प्रसङ्ग पृष्ठ १८७) ......... १५५ |
रेखा-चित्र
| १- नैमिषारण्यमें शौनकके प्रश्न करनेपर सौतिद्वारा ब्रह्मवैवर्तपुराणका परिचय देते हुए इसका महत्त्व-निरूपण .......................................... २४ | नारदका रोना तथा उनसे दोनों हाथ जोड़कर क्रोध रोकनेकी प्रार्थना करना ....... ४४ |
| २- गोलोककी ब्रह्मज्योतिमें स्थित श्यामसुन्दर ... २६ | ६- पुष्करतीर्थमें गन्धर्वराजका भगवान् शिवकी प्रसन्नताके लिये तप करना तथा भगवान् शिवका प्रत्यक्ष दर्शन होनेपर दण्डकी भाँति पृथ्वीपर पड़कर प्रणाम करना ......... ५३ |
| ३- गोलोकस्थ रासमण्डलमें श्रीकृष्णके वामपार्श्वसे एक कन्या (श्रीराधा)-का प्रादुर्भाव ...... ३४ | ७- मालावतीका अपने पतिके शवको छातीसे लगाकर योगासनसे बैठना तथा उसे बारम्बार शुभ दृष्टिसे देखना ...................... ५७ |
| ४- श्रीकृष्णका शंकरजीको बुलाकर देवी सिंहवाहिनीको ग्रहण करनेके लिये कहना तथा शंकरजीका अरुचि प्रकट करते हुए उनसे निरन्तर भजनके लिये वर माँगना ..... ३७ | ८- परमात्मा श्रीकृष्णका अपनी शक्तियोंके साथ मालावतीके पति-गन्धर्व उपबर्हणके |
| ५- जगत्पति ब्रह्माद्वारा शाप दिये जानेपर |