भारतकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished810 पृष्ठ

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( २० )

विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
अभीष्ट स्थानपर पहुँचनेमें विलम्ब होते देखकर उन्हें डाँटना-फटकारना ..........६४०मरे पुत्रको (जीवित अवस्थामें) समर्पित करना ...................................................७४०
९५- श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्नकी बालक्रीडा ....६४११०७- भीष्मकको शतानन्दका रुक्मिणीका श्रीकृष्णके साथ विवाह करनेकी सम्मति देना....७४४
९६- रातमें कंसद्वारा दुःस्वप्न देखा जाना .........६४५१०८- राजकुमार रुक्मीका श्रीकृष्णकी सेनाका अवलोकन कर कुपित होना तथा निष्ठुर वचन कहना ..........................................७४७
९७- कंसका अक्रूरसे नन्द-व्रजमें जानेके लिये कहना ....................................................६४८१०९- रुक्मिणी और श्रीकृष्णका विवाह ............७५१
९८- श्रीकृष्णकी दृष्टि पड़ते ही कुब्जाका सहसा अनुपम शोभा और रूप-यौवनसे लक्ष्मीके समान रमणीय हो जाना ..........................६६५११०- श्रीकृष्णके कहनेसे नन्द-यशोदाका ज्ञानप्राप्तिके लिये कदलीवनमें राधाके पास जाना और अचेतन अवस्थामें पड़ी राधाको चैतन्य करना .........................................७५३
९९- मथुरामें मालीको श्रीकृष्णका दास्यभावका वरदान देना ............................................६६६१११- सरस्वती देवीका आकर मायावती (रति)-को समझाना...........................७५८
१००- श्रीकृष्णद्वारा कंस-वध ...............................६६७११२- कामदेवद्वारा दैत्य शम्बरासुरका वध ......७५८
१०१- श्रीकृष्णका पुत्रवियोगसे कातर नन्दजीको अपना स्वरूप और प्रभाव बताना .........६६९११३- नरकासुरके राजमहलमें श्रीकृष्णका सोलह हजार कन्याओंसे पाणिग्रहण ..................७५९
१०२- वृन्दाद्वारा धर्मको अपनी गोदमें कर जीवनदानकी चेष्टा तथा धर्मपत्नी मूर्तिका उसे (धर्मको) जीवित करनेकी श्रीविष्णुसे प्रार्थना ................................................७०७११४- चित्रलेखाका द्वारकामें श्रीहरिके भवनसे सोते हुए अनिरुद्धको उठा ले जाना ......७६४
१०३- विरहविदग्धा राधाको उद्धवका प्रणाम करना .................................................७१९११५- श्रीशिवजीका बाणको (अनिरुद्धके साथ) कन्यादानके लिये समझाना ................७७१
१०४- मथुरा लौटकर श्रीकृष्णसे उद्धवका व्रजसमाचार-निवेदन .............................७३२११६- बाणासुरका हजारों बाण चलाना ..........७७५
१०५- माता देवकीद्वारा दिये गये आभूषणोंसे विभूषित श्रीबलराम और कृष्णका देवताओं और मुनियोंकी सभामें पधारना और ब्रह्मा, शम्भु, शेषनाग आदिद्वारा उनकी स्तुति......७३६११७- सुदर्शनचक्रद्वारा श्रीकृष्णका बाणासुरके हजारों हाथोंको काट डालना...................७७५
१०६- श्रीकृष्णद्वारा अपने गुरु सांदीपनिको उनके११८- शिवजीद्वारा बाणासुरको श्रीकृष्णके चरणमें समर्पित करना .....................................७७६
११९- श्रीराधाद्वारा गणेश-स्तवन ........................७८०

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