ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahma Vaivarta Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished810 पृष्ठ
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( १९ )
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| फूट-फूटकर रोने लगना ........................ | ४५३ | ७९- नन्दद्वारा इन्द्रयज्ञकी तैयारी देखकर श्रीकृष्णका विस्मित होकर उनसे पूजनके स्वरूप आदिके विषयमें प्रश्न करना ................................. | ५२८ |
| ६५- बालक श्रीकृष्णको गोपीका प्रसन्नतापूर्वक देखना ............................................. | ४६१ | ८०- गोवर्धन-पूजाके समय श्रीकृष्णका लोगोंसे वर माँगनेके लिये कहना ......................... | ५३१ |
| ६६- बालक श्रीकृष्णको गोदमें लेकर पूतनाका बारम्बार उनका मुख चूमना तथा सुखपूर्वक बैठकर उनके (श्रीहरिके) मुखमें अपना स्तन देना........................................... | ४६३ | ८१- श्रीहरि (कृष्ण)-का गोवर्धन पर्वतको बायें हाथमें छातेके डंडेकी भाँति धारण कर लेना .................................................. | ५३३ |
| ६७- श्रीकृष्णके पैरोंके आघातसे शकटका चूर-चूर होना तथा उसकी बिखरी हुई लकड़ियोंके भीतर दबे बालक (श्रीकृष्ण)-को यशोदाजीका गोदमें उठा लेना .......... | ४६६ | ८२- इन्द्रके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णका स्तवन .... | ५३४ |
| ६८- शिष्योंसहित मुनि गर्गका आगमन तथा यशोदाद्वारा उनका सत्कार और श्रीकृष्णको उन्हें प्रणाम करवाना ............................ | ४६९ | ८३- श्रीकृष्णका सुदर्शनचक्रसे दैत्यराज धेनुकासुरको काट डालना ......................................... | ५४० |
| ६९- श्रीकृष्णद्वारा दैत्यराज प्रलम्बका वध ........ | ४८९ | ८४- ब्रह्मा, शिव, पार्वती, धर्म, इन्द्र, रुद्र, दिक्पाल, ग्रह, अत्रि, लक्ष्मी, सरस्वती आदिका वैकुण्ठलोकमें आकर दुर्वासाके अपराधको क्षमाकर उनकी रक्षा करनेके लिये भगवान् विष्णुसे करुण प्रार्थना करना ..................... | ५५० |
| ७०- श्रीकृष्णके तेजसे दग्ध होकर दैत्यराज केशीका प्राण-परित्याग करना .......................... | ४९० | ८५- अपने घरपर आये हुए दुर्वासाको देखकर राजा अम्बरीषका उनके चरणोंमें हाथ जोड़कर प्रणाम करना ........................................ | ५५१ |
| ७१- श्रीकृष्ण, बलदेव और अन्य गोप-गोपियोंका गोकुल छोड़कर वृन्दावनके लिये प्रस्थान ..... | ४९६ | ८६- गौरीव्रतके पूर्ण होनेपर आकाशसे प्रकट होकर भगवती दुर्गाका मुस्कराते हुए मुखारविन्दसे राधिकाको सम्बोधित कर कहना ................................................. | ५६३ |
| ७२- विश्वकर्माद्वारा नन्दभवन और राजमार्ग आदिका निर्माण .................................. | ५०३ | ८७- रासमण्डलमें मधुसूदनद्वारा मुरलीवादन ..... | ५६७ |
| ७३- ब्राह्मणपत्नियोंद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति .......... | ५१० | ८८- वंशीनादको सुनते ही गोपियोंका अपने घरसे लाखोंकी संख्यामें निकल पड़ना ..... | ५६७ |
| ७४- श्रीकृष्णका विषमिश्रित यमुना-जल पीकर मरी हुई गौओंको जीवित करना .............. | ५१४ | ८९- श्रीराधाके साथ श्रीकृष्णका वनविहार तथा अष्टावक्रमुनिके द्वारा उनकी स्तुति ....... | ५७० |
| ७५- भगवान् श्रीकृष्णका रक्तरञ्जित मुखवाले कालियनागके मस्तकपर चढ़ना तथा उनके भारसे आक्रान्त हो कालियनागका प्राण त्याग देनेको उद्यत होना; नागपत्नी सुरसा तथा दूसरी नागिनियोंका श्रीहरिके सामने आकर रोना और उन्हें प्रणामकर अपनी बात कहना .......................................... | ५१५ | ९०- वैकुण्ठधाममें श्रीशिवजीका जाकर कमलाकान्त श्रीहरिको प्रणामकर उनके वामभागमें बैठ जाना ................................................ | ५७६ |
| ७६- श्रीकृष्णके विरहसे संतप्त कालियदहमें प्रवेश करनेके लिये उद्यत यशोदा, राधा और मूर्च्छित हुए नन्दराय आदि गोप-गोपियोंको बलरामजीद्वारा समझाया जाना ................. | ५२१ | ९१- ब्राह्मणबालकका रूप धारणकर शंकरजीका तपस्या करती हुई पार्वतीके पास आना और उनसे बातचीत ................................ | ५९१ |
| ७७- व्रजवासियों और व्रजाङ्गनाओंका कालियदहके जलसे ऊपर उछलते हुए श्रीकृष्णको देखना ...... | ५२२ | ९२- शिवद्वारा की हुई स्तुतिसे संतुष्ट होकर प्रकृतिरूपिणी सतीका प्रकट होना और उन्हें सान्त्वना देना .......... | ६१० |
| ७८- भाण्डीरवटके नीचे रत्नमय सिंहासनपर विराजमान श्रीकृष्णको अत्यन्त विस्मित होकर तथा हाथ जोड़कर ब्रह्माजीका प्रणाम करना ................................................ | ५२५ | ९३- मायासे शिशुरूपधारी जनार्दनद्वारा अग्निकी दाहिकाशक्तिका हरण तथा उसका दर्प भङ्ग करना .......................................... | ६२४ |
| ९४- सप्तर्षियोंद्वारा वाहित शिबिकापर बैठे नहुषका |