भारतकोश
ब्रह्मवैवर्त पुराण

ब्रह्मवैवर्त पुराण

Brahma Vaivarta Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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४५६संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराण

पञ्चामृत सुवर्णके पात्रमें रखा गया है। इसे आपकी सेवामें निवेदन करना है। आप स्नानके लिये इसका उपयोग करें।

अर्घ्य

हरे! दूर्वा, अक्षत, श्वेत पुष्प और स्वच्छ जलसे युक्त यह अर्घ्य सेवामें समर्पित है। इसमें चन्दन, अगुरु और कस्तूरीका भी मेल है। आप इसे ग्रहण करें।

आचमनीय

परमेश्वर! सुगन्धित वस्तुसे वासित यह शुद्ध, सुस्वादु एवं स्वच्छ जल आचमनके योग्य है। आप इसे ग्रहण करें।

स्नानीय

श्रीकृष्ण! सुगन्धित द्रव्यसे युक्त एवं सुवासित विष्णुतैल तथा आँवलेका चूर्ण स्नानोपयोगी द्रव्यके रूपमें प्रस्तुत है। इसे स्वीकार करें।

शय्या

श्रीहरे! उत्तम रत्न एवं मणियोंके सारभागसे रचित, अत्यन्त मनोहर तथा सूक्ष्म वस्त्रसे आच्छादित यह शय्या सेवामें समर्पित है। इसे ग्रहण कीजिये।

गन्ध

गोविन्द! विभिन्न वृक्षोंके चूर्णसे युक्त, नाना प्रकारके वृक्षोंकी जड़ोंके द्रवसे पूर्ण तथा कस्तूरीरससे मिश्रित यह गन्ध सेवामें समर्पित है। इसे स्वीकार करें।

पुष्प

परमेश्वर! वृक्षोंके सुगन्धित तथा सम्पूर्ण देवताओंको अत्यन्त प्रिय लगनेवाले पुष्प आपकी सेवामें अर्पित हैं। इन्हें ग्रहण कीजिये।

नैवेद्य

गोविन्द! शर्करा, स्वस्तिक नामवाली मिठाई तथा अन्य मीठे पदार्थोंसे युक्त यह नैवेद्य सेवामें समर्पित है। यह सुन्दर पके फलोंसे संयुक्त है। आप इसे स्वीकार करें। हरे! शक्कर मिलाया हुआ ठंडा और स्वादिष्ट दूध, सुन्दर पकवान, लड्डू, मोदक, घी मिलायी हुई खीर, गुड़, मधु, ताजा दही और तक्र—यह सब सामग्री नैवेद्यके रूपमें आपके सामने प्रस्तुत है। आप इसे आरोगें।

ताम्बूल

परमेश्वर! यह भोगोंका सारभूत ताम्बूल कर्पूर आदिसे युक्त है। मैंने भक्तिभावसे मुखशुद्धिके लिये निवेदन किया है। आप कृपापूर्वक इसे ग्रहण करें।

अनुलेपन

परमेश्वर! चन्दन, अगुरु, कस्तूरी और कुंकुमके द्रवसे संयुक्त सुन्दर अबीर-चूर्ण अनुलेपनके रूपमें प्रस्तुत है। कृपया ग्रहण कीजिये।

धूप

हरे! विभिन्न वृक्षोंके उत्कृष्ट गोंद तथा अन्य सुगन्धित पदार्थोंके संयोगसे बना हुआ यह धूप अग्निका साहचर्य पाकर सम्पूर्ण देवताओंके लिये अत्यन्त प्रिय हो जाता है। आप इसे स्वीकार करें।

दीप

गोविन्द! अत्यन्त प्रकाशमान एवं उत्तम प्रभाका प्रसार करनेवाला यह सुन्दर दीप घोर अन्धकारके नाशका एकमात्र हेतु है। आप इसे ग्रहण करें।

जलपान

हरे! कर्पूर आदिसे सुवासित यह पवित्र और निर्मल जल सम्पूर्ण जीवोंका जीवन है। आप पीनेके लिये इसे ग्रहण करें।

आभूषण

गोविन्द! नाना प्रकारके फूलोंसे युक्त तथा महीन डोरेमें गुँथा हुआ यह हार शरीरके लिये श्रेष्ठ आभूषण है। इसे स्वीकार कीजिये।

पूजोपयोगी दातव्य द्रव्योंका दान करके व्रतके स्थानमें रखा हुआ द्रव्य श्रीहरिको ही