ब्रह्मचर्य ही जीवन है

ब्रह्मचर्य ही जीवन है
Brahmacharya Hi Jeevan Hai
स्वामी शिवानन्द द्वारा
स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)
DevanagariHindipublished199 पृष्ठ
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प्रकाशक—
केदारनाथ गुप्त
मैनेजिंग-प्रोमोडर
छात्रदितकारी-पुस्तकमाला
दारागंज, प्रयाग
प्रथम संस्करण सन् १९२२—१०००
द्वितीय , , फरवरी सन् १९२५—२०००
तृतीय , , दिसम्बर सन् १९२६—२०००
चतुर्थ , , दिसम्बर सन् १९२७—२०००
पंचम , , जनवरी सन् १९२९—३०००
सुत्रक—
पं० विश्वम्भरनाथ वाजपेयी
ओंकार प्रेस,
इलाहाबाद