ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
सात्विक भोजन
चेरू, हवि अन्नम, दूध, गेहूँ, जौ, रोटी, घी, मक्खन, सोंठ, दाल (मूँगकी), आलू, खजूर, केले, दही, बादाम और फल—ये सात्विक भोजन के पदार्थ हैं। उबाले हुये सफेद चावल, घी, चीनी और दूध के मिलाव को चेरू कहते हैं। हविस अन्न भी इसी प्रकार से बनता है। आध्यात्मिक साधकों के लिये यह बहुत लाभदायक है। दूध, स्वयं एक पूर्ण भोजन है क्योंकि उसमें मित्र मित्र पौष्टिक अंश समुचित परिमाण में होते हैं। योगी और ब्रह्मचारियों के लिये यह एक आदर्श भोजन है। फल अधिक शक्ति देने वाले हैं। केला, अंगूर, मीठे संतरे, सेब, अनार, और आम ये सब स्वास्थ्य प्रद और पुष्टिकर फल हैं।
सूखे फल जैसे मुनक्का, छोटी दाख, खजूर, अंजीर, मीठे ताजे फल जैसे अनार, आम, केला, सपोटा, तरबूज, मीठे अनार, चीनी (शकर), मिश्री, शहद, साबूदाना, आरासू, दूध, मक्खन, गौघृत, कच्चे नारियल का पानी, नारियल की गिरी, बादाम, पिस्ता, तूर की दाल, रागी, जौ, मक्की, गेहूँ, मूँग, धान (छिलका सहित लाल चावल), स्वादिष्ट सुगंधित चावल, तथा इन धानों के बने हुए सभी पदार्थ और सफेद कदू—ये सब ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिये योग्य या उचित पदार्थ हैं।
त्याज्य भोजन
अत्यन्त स्वादिष्ट भोजन, उष्ण कदी, चटनी, मिर्च, मांस, मछली, अंडे, तंबाखू, मदिरा, खट्टे पदार्थ, तेल (सब प्रकार के), लहसुन, प्याज, कड़ये पदार्थ, खटा दही, नीरस या फीके भोजन, खट्टे, कड़ज करने वाले उत्तेजक