ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमेरे प्रिय भाइयो ! याद रखिये आप मांस तथा हाड से निर्मित स्वर शरीर नहीं है। आप अमर सर्वव्यापक सच्चिदानन्द आत्मा हैं। आप सजीव सत्य हैं। आप ब्रह्म हैं। आप आत्मा हैं। आप परम अतन्य हैं। आप सच्चे ब्रह्मचारी का जीवन-यापन कर इस परमावस्था को प्राप्त कर सकते हैं।
उपसंहार करते हुये मैं अपने दोनों हाथों को जोड़ कर हार्दिक गर्भना करता हूँ कि आप सभी शांति एवं सम्पत्ति के प्रबल शत्रु काम र विजय पाने के लिये साधना के द्वारा प्रबल संग्राम करेंगे। वास्तविक ब्रह्मचारी ही इस जगत का महान् सम्राट् है। सारे ब्रह्मचारियों को मेरा मूक नमस्कार है। उनकी जय हो ! मेरी प्रार्थना है कि शिस्तक, प्राध्यापक, तथा शिक्षा-विभाग के अधिकारी जन इस महत्वपूर्ण विषय नम्रचर्य की ओर अपना विशेष ध्यान देंगे जिससे कि भावी संतति का उत्थान हो सके।
आपके चेहरों से ईश्वरीय ज्योति विभासित हो !
आप सबों में ईश्वरीय ज्योति अधिकाधिक प्रखर हो !
आपमें दिव्य-शक्ति तथा शान्ति सदा के लिये निवास करे !
॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
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[ तेरह ]