भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

पृष्ठ 12, कुल 237 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 12

करने की शक्ति, तथा श्रमत्त्व प्राप्त कीजिये। जिसके पास वीर्य पर पूर्ण नियन्त्रण है, वह व्यक्ति उन शक्तियों को प्राप्त कर लेता है जिन्हें अन्य किसी साधन से नहीं प्राप्त कर सकते।

लोग ब्रह्मचर्य के बारे में बहुत बातें करते हैं। परन्तु व्यावहारिक जन तो विरले ही मिलते हैं। ब्रह्मचर्य का जीवन सन्मनुष्य ही कठिनाइयों से भरा हुआ है। परन्तु लौह संकल्प, धैर्य तथा संलग्न व्यक्ति के लिये मार्ग सुगम हो जाता है। हम वास्तविक ब्रह्मचारियों को कार्यक्षेत्र में देखना चाहते हैं जो अपने सखल शरीर, आदर्श जीवन, भव्य चरित्र तथा आध्यात्मिक बल से लोगों पर प्रभाव डाल सकें। केवल बातें करने से तो कोई लाभ नहीं होगा। कुछ व्यावहारिक जन आगे बढ़ें तथा आध्यात्मिक तेजस् के द्वारा कुमार्ग एवं युवकों का पथ-दर्शन करें। सिद्धांत से उदारहण कहीं बढ़कर है।

आज मानव जीवन की औसत अवधि ४० वर्ष की हो गई है जब कि पहले १०० वर्ष की थी। देश के प्रत्येक सुमेच्छु को चाहिए कि वह इस अपमान जनक अवस्था के प्रति सावधानी पूर्वक विचार करे, तथा समय रहते ही इसको सुधारने के लिए प्रयत्न शील बने। देश क भविष्य युवकों पर ही अवलंबित है। सन्ध्यासियों, साधुओं, गुप्तज्ञों शिष्यों तथा माता पिताओं का यह कर्तव्य है कि वे ब्रह्मचर्य-जीवन को पुनः जनता के जीवन में लाने के लिये प्रयत्नशील बनें।

हे कृष्ण, तु मुझे बहुत प्रिय है क्योंकि तू सत्यमार्ग पर चल रहा है। तू सच्चाई पूर्वक संग्राम कर रहा है। तू आत्मसात्कार के मार्ग का अनुगमन कर रहा है। यही कारण है कि मैंने आपको यह सम्मति दी है। तू नित्य, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, आत्मा है। हे प्रिय आनन्द! इसका अनुभव कीजिये। इस जन्माधिकार को प्राप्त कीजिये। विविध कार्यों में संलग्न रहते हुये भी इस जन्माधिकार को न छोड़िये। गुहा-जीवन से यह कहीं अन्च्छा है। यह सक्रिय जीवन है। यह शिव का सम्पूर्ण योग है। यही शंकर तथा बुद्ध का भी योग था।

[ बाएह ]