ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
DevanagariHindipublished237 पृष्ठ
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दशवां अध्याय
कहानियां और चरित्र
(१) जैमिनी ऋषि
एक बार ध्यास मुनि अपने शिष्यों को वेदान्त की शिक्षा दे रहे थे। प्रसंग वश उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि नवयुवक ब्रह्मचारियों को पूर्णतया सावधान रहना चाहिए कि वे युवती स्त्रियों का संग कदापि न करें क्योंकि काम ऐसा प्रयत्न है कि सर्वतः सावधान रहने पर भी वे काम के शिकार बन सकते हैं। जैमिनी नाम का एक शिष्य—जो पूर्व मीमांसा का रचयिता था—कुछ पूछा था। उसने कहा “गुरु जी महाराज ! आपका कथन असत्य है। कोई भी स्त्री मुझे आकर्षित नहीं कर सकती। मैं ब्रह्मचर्य में प्रतिष्ठित हूँ।” कुछ दिनों के पश्चात् व्यास
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