ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मचारी का गीत
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मैं निःशंक नैष्ठिक ब्रह्मचारी हूँ ।
मैंने बचपन ही से अखंड ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा ले रखी है ।
मैं भीष्म, लक्ष्मण, सनक, सनंदन, सनतसुजात और सनत कुमार का वंशज हूँ ।
मैं अखंड ब्रह्मचारी के नाम से भी प्रख्यात हूँ,
कोई कोई मुझे बाल ब्रह्मचारी भी कहते हैं,
मैं इन नामों की ओर ध्यान भी नहीं देता, क्योंकि वे असत्य हैं ।
मैंने दर्शन, केलि, कीर्तन, गुह्यभाषण, संकल्प, अध्ययसाय और क्रिया-निवृत्ति इन आठ प्रकार के अवरोधों (विध्वंशों) का परिहार किया है ।
जब मैं रास्ते में चलता हूँ तो सदा अपने पैर के अंगूठे की ओर ही देखता रहता हूँ ।
मैं स्त्रियों को और काम-दृष्टि से नहीं भांकता,
मैं शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य में सुव्यवस्थित हूँ ।
मैं पौष्प और शक्ति-शाली उर्ध्वरेता योगी हूँ ।
मैं शीर्षासन और सर्वांगासन भी किया करता हूँ ।
मैं भगवत् चिंतन के लिये सिद्धासन पर बैठता हूँ।
मैं बंध और मुद्राओं में भी प्रवीण हूँ ।
मैं नौली और बज्रौली भी सरलता पूर्वक कर सकता हूँ ।
मैं अधिक समय के लिये अपने प्राण का अवरोध कर सकता हूँ ।
मैं उसे तुरंत अपनी हृच्छानुसार सहस्रार में ले जा सकता हूँ ।
मैं नित्य अपने सच्चिदानंद स्वरूप में स्थित रहता हूँ ।
मैं शान और जीवन की एकता का अनुभव करता हूँ ।