ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
| (३) कीर्तन | .... | ३० मिनट |
|---|---|---|
| प्रार्थना | .... | ३० " |
| मत्संग | .... | ॥ घंटा |
| ध्यान | .... | ३० मिनट से ३ घंटे |
| त्रिफला का पानी | ... | प्रातःकाल में |
(४) ॐ या भगवान् कृष्ण के चित्र पर जाटक करना
१० मिनट
द्वारे राम कीर्तन और जप ..... ३० मिनट
( वादाम और मिश्री-शर्बत, शीष्म ऋतु में लेना चाहिए )
जप के लिये मन्त्र
विष्णु भक्तों के लिये ... ॐ नमो नारायणाय
शिव भक्तों के लिये ... ॐ नमः शिवाय
भगवान् कृष्ण के भक्तों के लिये ॐ नमो भगवते
वासुदेवाय
भगवान् राम के भक्तों के लिये श्रीराम.या श्री सीताराम
द्विजो (ब्राह्मण, दक्षिण और वैश्यो) के लिये गायत्री
मंत्र निर्गुण उपासकों के लिये ... ॐ या सोऽहम्
नोट:—थाप उपयुक्त चार वर्गों (समूहों) में से
किसी भी एक वर्ग के विषयों का अभ्यास कर सकते हैं
या वर्ग १ और ३ या ४ या १. २. ३. और ४ को अपने
सुविधा के अनुसार मिला सकते हैं।
ब्रह्मचर्य माला
ब्रह्मचर्य सर्वश्रेष्ठ तप है। विष्णुद्ध ब्रह्मचारी मनुष्य नहीं अपितु साक्षात् देवता है। जो यज्ञ पूर्वक अपने वीर्य की रक्षा करता है, उस ब्रह्मचारी के लिये इस संसार में क्या अप्राप्य है? वीर्य की शान्ति रूपी शक्ति के द्वारा कोई भी ब्रह्मचारी मेरे समान बन सकता है। —शंकर