भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य क. पुस्तक

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आलस्य और मन की अस्थिरता—ये दो बड़े भारी विघ्न हैं;

प्राणायाम और कार्य-संलग्न-स्वभाव के द्वारा मार्ग नितान्त स्पष्ट रहता है ।

मेरा शरीर कमल-पुष्प की भांति सुगंधित है;

मेरे नेत्र हीरक की भाँति प्रकाश मान हैं;

मेरा शरीर हल्का और मल त्याग अत्यंत है;

मेरी बाष्पी बुलंद (प्रबल) तथा मेरा स्वर कोकिल कंठ की भांति मधुर है;

ब्रह्मचर्य व्रत ही इन सब का कारण है,

आप लोग भी इस महाम्रत को क्यों नहीं धारण करते ?

(२) ब्रह्मचर्य के नुस्खे

(१) ीर्वासन....५ मिनट
सर्वांगसन....१० ”
मत्र (एकादशी अथवा हर दूसरे इतवार को)
जप....१ घंटा
गीता का अध्ययन....१ ”
सगुण या निर्गुण ध्यान....३० मिनट

(इसे दो घंटों तक बढ़ाइये)

(२) सिद्धान्त....३० मिनट
प्राणायाम....३० ”
दूध और पल....रात्रि में
उठियान वन्द्य....१० मिनट

(मन को पढ़ने, यगीचा लगाने, कीर्तन करने आदि कार्यों में सदा पूर्णतः लगाये रखना चाहिये)