ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
DevanagariHindipublished237 पृष्ठ
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ब्रह्मचर्य क. पुस्तक
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आलस्य और मन की अस्थिरता—ये दो बड़े भारी विघ्न हैं;
प्राणायाम और कार्य-संलग्न-स्वभाव के द्वारा मार्ग नितान्त स्पष्ट रहता है ।
मेरा शरीर कमल-पुष्प की भांति सुगंधित है;
मेरे नेत्र हीरक की भाँति प्रकाश मान हैं;
मेरा शरीर हल्का और मल त्याग अत्यंत है;
मेरी बाष्पी बुलंद (प्रबल) तथा मेरा स्वर कोकिल कंठ की भांति मधुर है;
ब्रह्मचर्य व्रत ही इन सब का कारण है,
आप लोग भी इस महाम्रत को क्यों नहीं धारण करते ?
(२) ब्रह्मचर्य के नुस्खे
| (१) ीर्वासन | .... | ५ मिनट |
|---|---|---|
| सर्वांगसन | .... | १० ” |
| मत्र (एकादशी अथवा हर दूसरे इतवार को) | ||
| जप | .... | १ घंटा |
| गीता का अध्ययन | .... | १ ” |
| सगुण या निर्गुण ध्यान | .... | ३० मिनट |
(इसे दो घंटों तक बढ़ाइये)
| (२) सिद्धान्त | .... | ३० मिनट |
|---|---|---|
| प्राणायाम | .... | ३० ” |
| दूध और पल | .... | रात्रि में |
| उठियान वन्द्य | .... | १० मिनट |
(मन को पढ़ने, यगीचा लगाने, कीर्तन करने आदि कार्यों में सदा पूर्णतः लगाये रखना चाहिये)