ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 170, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंअन्य उपाय निरर्थक
१५५
विवाह के पुराने विचारों के अविष्कार से भी समर्थन होता है। जहाँ तक मेरा विचार है, विवाहित जीवन में ब्रह्मचर्य धारण करने से ब्रह्मचर्य अपनी स्वभाविक स्थिति को ग्रहण करेगा तथा विवाह की यथार्त्ता को भी सरल बना देगा। जन्म निरोध के अन्य उपाय सब निरर्थक हैं। एक बार जब स्त्री-पुरुषों के यह बात अच्छी प्रकार से समझ में आ गई कि भोग-इंद्रिय का मुख्य कार्य संतानोत्पत्ति ही है तो फिर वे अन्यथा प्रसंग कर अपने वीर्य तथा बहुमूल्य शारीरिक व मानसिक शक्ति को नष्ट करना एक प्रकार का पाप समझने लेंगे। अब यह समझना सरल है कि हमारे प्राचीन वैज्ञानिकों ने वीर्य को इतना महत्व क्यों दिया है तथा क्यों उसको, समाज के हित के लिये श्रोत्र शक्ति में परिणत करने पर इतना जोर दिया है। उनकी यह घोषणा है कि जिसने अपनी जननेन्द्रिय पर पूर्णतः विजय प्राप्त की है, वही शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति को प्राप्त कर अन्य सब अप्राप्य सिद्धियों को प्राप्त कर लेगा है।