ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य साधना
उत्कंठाओं के द्वारा अज्ञान पूर्वक काम के वशीभूत हो जाते हैं । मनुष्य को प्रभावित करने वाली सारी लालसाओं पर विजय प्राप्त करना ही सफलता प्राप्त करने का वास्तविक उद्योग है । जब कि साधारण पुरुष व स्त्री द्वारा ब्रह्मचर्य प्राप्त करना असंभव नहीं है तथापि इससे यह नहीं समझना चाहिये कि उसमें कुछ कम पुरुषार्थ की आवश्यकता है; नहीं नहीं, उस में तो उस से भी अधिक पुरुषार्थ की आवश्यकता है जो पुरुषार्थ कि एक साधारण विद्यार्थी किसी विज्ञान (विद्या) में पूर्णत्व प्राप्त करने के लिये निष्कपट हृदय से करता है । यहाँ, ब्रह्मचर्य की प्राप्ति से तात्पर्य है जीवन-विज्ञान पर प्रभुत्व प्राप्त करना ।
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