भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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राग जय

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चिंता न कीजिए। अपना काम संभालिये। ईश्वर सर्व शक्तिमान है। यदि ऐसा भी हो कि सयों के संन्यास लेने से सारा जगत क्षय पर जात्र तो ईश्वर पल मात्र में ही करोड़ों मनुष्यों की सृष्टि कर सकता है। इसके लिए आपको पेशान होने की अवश्यकता नहीं है। अपने काम को निर्मूल करने की विधि आप द्वंद्व निकालिए।

जगत की आवादी बराबर बढ़ती जा रही है तथा लोगों में जरा भी धार्मिक भावना नहीं। राग का ही बोलबाला है। लोगों के मन कामुक विचारों से भरे हुये हैं। यह जगत फैशन, रिस्तरों, होटेल, भोजन, नृत्य तथा सिनेमा से ही भरा हुआ है। भोजन, पान तथा सन्तानोत्पादन—यही उनके जीवन का आरम्भ तथा अन्त है। लोगों की आवादी बढ़ने के अनुपात में अब्र की वृद्धि नहीं हो रही है। अकाल तथा विनाश की संभावना है। जगन्माता अधिक आवादी को बहा ले जाती है। लोग कृत्रिम साधनों के द्वारा जन्म-निरोध करना चाहते हैं। परन्तु वे सारे साधन मूर्खता से पूर्ण हैं। किसी को भी उसमें सफलता नहीं मिली है। एक शुक्रकीट में भी प्रबल शक्ति है। वीर्य की क्षति होती है। ब्रह्मचर्य के द्वारा इस शक्ति को अंजुस् में बदल दिया जाता है। सारा जगत प्रबल कामोत्तेजन से परिपूर्ण है। तथाकथित शिक्षित जन भी इसके अपवाद नहीं हैं। सभी भ्रम में पड़े हैं तथा जगत में विपरीत बुद्धि के अनुसार ही वर्तते हैं। उनकी अवस्था दयनीय है। ईश्वर उनको उन्नत बनावे तथा उनकी आँखें आध्यात्मिक धामों की ओर लगावे। जन्म-निरोध के लिये आत्म-संयम तथा ब्रह्मचर्य ही एकमात्र प्रभावशाली साधन हैं।

बाल विवाह तथा अल्पावस्था में ही विवाह का हो