भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

आपको पूरी स्वतन्त्रता है कि आप तीन सौ पचास श्रोतों गं शादी कर लें तथा जितनी अधिक संतति चाहें पैदा कर सकते हैं। कोई भी आपको रोकता नहीं। परन्तु आपको बहुत ही शीघ्र यह पता चल जायगा कि संसार आपको तृप्ति नहीं दे सकता। जैसा कि आप चाहते हैं। क्योंकि सभी विषय-पदार्थ देश, काल तथा कारणत्व से सीमित हैं। वे मृत्यु, रोग, ब्रह्मावस्था, चिंता, शोक, भय, तृति; निराशा, विकलता, गर्मी, सर्दी, सर्पदंश, विच्छू देश, भूकंप से हमेशा आच्छन्न हैं। एछ क्षण के लिए भी आप शांति को नहीं पा सकते। आपका मन काम तथा मल से परिपूर्ण है। आपकी बुद्धि विपरीत हो चली है। आप समझते नहीं। आप जगत के मिथ्या रूप को नहीं समझ सकते। काम को सफलता पूर्णक वशीभूत किया जा सकता है। इसके लिए शक्तिशाली साधन हैं। काम की वश में कर लेने के बाद आप आन्तरिक नित्य सुख का उपभोग करेंगे—जो आत्मा है। सभी संन्यासी नहीं बन सकते। वे कामुक हैं अतः वे संसार का त्याग नहीं कर सकते। उनके बन्धन विशाल हैं। वे अपने बच्चों सम्भति तथा स्त्रियों से गुंथे हैं। आपका कथन पूर्णतः गलत है। यह असंभव है। क्या कभी आपने इतिहास के पन्नों में ऐसा देखा है कि सभी ने संन्यास ले लिया हो और यह जगत शून्य हो गया हो। फिर भी आप इस गलत विचार को क्यों रखते हैं? यह आपके मन की धूर्तवाजी है जिसके द्वारा आपके मूर्खतापूर्ण तर्क को सहारा मिलता है और काम-तृप्ति के सौतान-दर्शन की परिपुष्टि होती है। भविष्य में ऐसी बातें ल कीजिए। इसके द्वारा आपकी मूर्खता तथा कामुकता का प्रदर्शन होता है। इस जगत की अधिक