भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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राग जय

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प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करने के परिणामस्वरूप उसको भविष्य में भारी सजा भोगनी पड़ेगी।

पश्चिम से आपने फैशन तथा पोशाक सम्बन्धी बहुत सी आदतें सीखी हैं। आप नकल करने वाले जीव बन बैठे हैं। परन्तु पश्चिम में लोग तब तक विवाह नहीं करते जब तक कि पूरे परिवार को पालने में समर्थ न हो जायें। उनमें अधिक आत्मसंयम है। वे पहले किसी अच्छे काम में लग जाने पर तथा अर्थोपार्जन कर लेने पर ही विवाह की चिन्ता करते हैं। यदि उनके पास पर्याप्त धन नहीं है तो वे आजीवन कुश्रारे ही रह जाते हैं। वे इस संसार में भिखारियों की बुद्धि करना नहीं चाहते। जिसने मानव-दुख की विशालता को समझ लिया है वह स्त्री के गर्भ से एक बच्चा भी उत्पन्न करने का साहस कदापि नहीं करेगा।

कम वेतन प्राप्त करने वाला मनुष्य जिसे बड़े परिवार का पालन पोषण करना है उसे घूस लेने के लिये बाध्य होना पड़ता है। वह अपनी सम्भू खो बैठता है तथा अर्थोपार्जन के लिये कितना भी निकुट कार्य को करने में हिचकता नहीं। ईश्वर की याद नहीं आती। वह राग का गुलाम हो जाता है। वह अपनी पत्नी का गुलाम बन जाता है। उसकी माँगों की पूर्ति न कर सकने पर वह अपनी पत्नी के व्यंग्य वचनों को मन मारकर सहता रहता है। उसे कर्म, संस्कार तथा आन्तरिक मानसिक फँसटरी के कार्य व्यापार का ज्ञान नहीं है। घूस लेना, दूसरों को ठगना, झूठ बोलना आदि की सुखी आदतें उसके चित्त में घुसी हुई हैं तथा भविष्य के हर शरीर में उन आदतों का समावेश हो जाता है। वह आने वाले