ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
DevanagariHindipublished237 पृष्ठ
पृष्ठ 236, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 236
सर्वं ब्रह्मार्पणम्
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
श्लोक
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा
बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् ।
करोमि यं चत् सकलं परस्मै
नारायणायेति समर्पयामि ॥
अर्थ
[पने शरीर से, वाणी से, मन से, इन्द्रियों से, बुद्धि अथवा प्रकृति के स्वभाव से जो कुछ करता हूँ, वह र वश नारायण को समर्पण करता हूँ।]
— 0 —
लोका—स्समस्ता—स्मुखिनो भवन्तु
लोका—स्समस्ता—स्मुखिनो भवन्तु
लोका—स्समस्ता—स्मुखिनो भवन्तु
ओउम् शान्तिः शान्तिः शान्तिः