भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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सर्वं ब्रह्मार्पणम्

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा

श्लोक

कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा

बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतेः स्वभावात् ।

करोमि यं चत् सकलं परस्मै

नारायणायेति समर्पयामि ॥

अर्थ

[पने शरीर से, वाणी से, मन से, इन्द्रियों से, बुद्धि अथवा प्रकृति के स्वभाव से जो कुछ करता हूँ, वह र वश नारायण को समर्पण करता हूँ।]

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लोका—स्समस्ता—स्मुखिनो भवन्तु

लोका—स्समस्ता—स्मुखिनो भवन्तु

लोका—स्समस्ता—स्मुखिनो भवन्तु

ओउम् शान्तिः शान्तिः शान्तिः