भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्ये सम्बन्धी तीन प्रेरणात्मक पत्र २२१

जाइये । आप अन्ततः विजयी होंगे । बुरे विचारों की ओर जरा भी ध्यान न दीजिये । उन्हें मरा हुश्रा ही मानिए । उन्हें अपनी दृष्टि में सदा नीचे रखिए । विफलताओं को भूल जाइए । कामनायें तथा कुट्टितियाँ यदि बनी रहें तो निराशा न होइए । आप अपनी साधना में सदा नियमित हैं तो वे आप ही विलीन हो जायंगी ।

मन में जब मलिन विचारों के बादल उमड़ने लगें तो गीता जैसे सद्ग्रन्थों का स्वाध्याय कीजिए । ईश्वर से प्रार्थना कीजिए । उग्रतापूर्वक उसके नाम का जप कीजिए । कीर्त्तन कीजिए । ऐसा अनुभव कीजिए कि ईश्वर सदा आपके साथ ही है । कुछ प्राणायाम कीजिए । अथवा गहरा श्वास-प्रश्वास लीजिए । अलिंग शुद्ध आत्मा के साथ अपनी एकता स्थापित कीजिए । काम-वृत्ति का साक्षी बनाएँ । ठंडे जल में स्नान कीजिए । यदि मानसिक ब्रह्मचर्य में आप समर्थ न हों तो कम से कम शारीरिक ब्रह्मचर्य का तो पालन कीजिए ही । बुरे विचार आपके शत्रु हैं । उनके साथ तादात्म्य सम्बन्ध स्थापित न कीजिए । उदासीन रहिए । वे गुजर जायेंगे । मन को शुद्ध दिव्य विचारों के द्वारा परिष्कावित कर डालिए । ईश्वर अथवा शुद्धता का चिन्तन कीजिए । सावधान रहिए । तथा बुरे विकल्पों को आरम्भ में ही भगा डालिए । मन में ईश्वर की मूर्ति को लाइए । उसकी कृपा आपको सहायता देगी ।

प्याज, लहसुन, तथा मांस का परित्याग कीजिए । उनके द्वारा कामोद्दीपन होता है । सदा याद रखिए “विषय सुख आते हैं तथा ठहरते नहीं हैं । मांस तो मिट्टी का

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