भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

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ब्रह्मचर्य साधना

है। जप, कीर्तन, ध्यान आदि के द्वारा काम-शक्ति को दिव्य ओजस् में परिणत करना होगा। काम-वृत्ति के संपूर्ण विनाश के लिए ईश्वर की कृपा का होना अत्यन्त आवश्यक है। इसके लिए आपको समय लगेगा। धैर्य को बनाए रखिए। ध्यान से प्रखुर आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। वह शक्ति काम-शक्ति को दिव्य ओजस् शक्ति में रूपांतरित कर डालती है। ब्रह्मचर्य के बिना आध्यात्मिक उन्नति तथा ईश्वर साक्षात्कार संभव नहीं है। अतः पूर्ण ब्रह्मचर्य में प्रतिष्ठित होइये। पवित्रज्ञा के मार्ग में ब्रह्मचर्य प्रथम चरण है।

जप के अभ्यास के द्वारा ब्रह्मचर्य में सहायता मिलती है। मन में ईश्वर की मूर्ति के विराजमान रहने से काम का प्रवेश नहीं हो सकता। ईश्वर पर मन को एकाग्र करने से आप कामावेग से मुक्त हो जायेंगे। जितना अधिक आप ईश्वर का चिंतन करेंगे उतना ही आपका सांसारिक सुकाव कम होता जायगा। आत्मसंयम मन की शक्ति को दिव्य मार्ग में लगा देता है। मन को उन्नत वस्तुओं की ओर लगा दीजिए। जीवन में महान् आदर्श को रखिए।

ईश्वर आपको पूर्ण ब्रह्मचर्य का आशीर्वाद दे।

आपका आत्मस्वरूप

—स्वामी शिवानन्द

३:—काम का दमन

अमर ज्योति,

ईश्वरीय मार्ग पर चलने के लिए कठिन प्रयास कीजिए। यदि गिरे तो फिर उठ जाइए तथा संग्राम करते