भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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दूसरा अध्याय

दीर्घायु का रहस्य

केवल सदाचार ही के द्वारा आप पूर्ण आयु और नित्यमन्द प्राप्त कर सकते हैं, यद्यपि आप में अन्य गुण न भी हों। चरित्र-निर्माण ही आचार है। आपका चरित्र उत्तम होना चाहिए। अन्यथा आप ब्रह्मचर्य या बल (बल) हीन होकर असामयिक मृत्यु प्राप्त करेंगे। श्रुतियों में मनुष्य की पूरी आयु एक सौ वर्षों की घोषित की गई है। यह केवल ब्रह्मचर्य ही के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। यहां आपको एक बात और स्मरण रखने की है : वह यह है कि दीर्घायुष्य का रहस्य, खान-पान के विचार, संयम, अरुपाहार, पवित्रता (ब्रह्मचर्य) और जीवन में आशावाद की दृष्टि पर निर्भर है। तदनुसार पेद्रू (अधिक भोजन करने वाला), शराबी, आलसी, दुराचारी और निरुद्योगी मनुष्य कभी भी पूरा आयुष्य प्राप्त करने की आशा नहीं रख सकता।

“मनुष्य की आयु सौ या सौ से भी अधिक हो सकती है;” यह कोई काल्पनिक उक्ति (कथन) नहीं है। प्राकृतिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों के अनुसार, प्रौढ़ावस्था प्राप्त करने के लिए जितना समय की आवश्यकता है, उससे

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