ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 33, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंदीर्घायु का रहस्य
१५
कम से कम पांच गुणा समय मनुष्य की सम्पूर्ण आयु का होना ही चाहिए। यह एक प्रचलित नियम है जिसका उदाहरण पशु-सृष्टि में दिया जाता है। घोड़ा प्रायः चार वर्ष तक बढ़कर मौजूद हो जाता है और प्रायः १२ से १४ वर्ष तक जीता है; ऊँट प्रायः ८ वर्ष की आयु तक बढ़ता है और प्रायः ४० वर्ष तक जीवित रहता है। पाश्चात्य देश के श्री मिल्टन सेचरेन का कथन है कि मनुष्य प्रायः २० या २५ वर्षों तक बढ़ कर युवावस्था प्राप्त करता है और पुनः यदि कोई असाधारण घटना न हो, पूरे सौ वर्षों से कम नहीं जी सकता। अब इसकी तुलना, हमारे भूति पुराणादि हिंदू शास्त्रों में बताए हुए समय तथा पूरे २५ वर्ष तक की ब्रह्मचर्यावस्था के साथ कीजिए। ब्रह्मचारी के लिए पूर्ण बुद्धि का जो समय बताया गया है वह केवल वीर्य रक्षण तथा पूर्ण ब्रह्मचर्य के द्वारा स्थापित किया जा सकता है; अतः राज योग के लेखक महर्षि पातंजलि का कथन है—“ब्रह्मचर्य प्रतिष्ठायां वीर्य लाभः”
ऐसे भी उदाहरण मिलेंगे कि जिनमें कतिपय चरित्र-भ्रष्ट मनुष्य भी बुद्धिमान हुए हैं तथा दीर्घायु प्राप्त की है। इसका प्रत्यक्ष कारण केवल उनका प्रारब्ध ही कहा जा सकता है। परन्तु यदि उनमें ब्रह्मचर्य और चरित्र की पवित्रता होती तो वे इससे भी अधिक शक्ति-शाली और प्रतापी होते।
ब्रह्मचर्य का तात्पर्य
पवित्र जल, वायु, स्वास्थ्य-प्रद भोजन, शारीरिक-व्यायाम, मैदान के खेल, तीव्र गति में दहलना, नाच चलाना, तैरना, टैनिंग आदि खेल खेलना—ये सब ही