ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
पृष्ठ 39, कुल 237 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मचर्य का महत्व
२१
उनके गुणों ही के कारण दिया। उनमें इच्छा मृत्यु की शक्ति थी। इन्द्रजीत को यह वरदान था कि उसको केवल वही मनुष्य मार सकेगा जिसने कि पूरे १४ वर्षों तक सर्व प्रकार से ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया हो—वह था लक्ष्मण जिसने इन्द्रजीत का अपने ब्रह्मचर्य के बल के द्वारा वध किया। विशाल पर्वत को उखाड़ कर ले आना तथा अन्य बड़े बड़े कार्यों का करना हनुमान के लिए कुछ भी नहीं था। यह सब ब्रह्मचर्य की शक्ति का प्रताप था।
“ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमुपाध्वन्त”—बेदों की घोषणा है कि ब्रह्मचर्य और तप के द्वारा देवताओं ने मृत्यु पर विजय प्राप्त की। हनुमान किस प्रकार महावीर हो गया? वह यह ब्रह्मचर्य रूपी शस्त्र ही था कि जिसके द्वारा उसने अतीत बल और साहस की प्राप्ति की। वह यही ब्रह्मचर्य रूपी शस्त्र था कि भीष्म पितामह ने मृत्यु पर विजय प्राप्त की। वह यही आदर्श ब्रह्मचारी लक्ष्मण था कि जिसने तीनों लोकों को जीतने वाले महा शक्तिशाली रायण-पुत्र मेघनाथ को पराजित किया। राजाधिराज पृथ्वीराज की वीरता और महानता का कारण भी उसके ब्रह्मचर्य का बल ही था। तीनों लोकों में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जो ब्रह्मचारी प्राप्त न कर सके। प्राचीन काल के महर्षिगण ब्रह्मचर्य के मूल्य को पूर्णतया समझते थे; यही कारण है कि उन्होंने ब्रह्मचर्य के महत्व की प्रशंसा सुन्दर सुन्दर छन्दों में वर्णन की है।
पुराणों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि दूरदर्शिता और अलौकिक दृष्टि ब्रह्मचर्यों के प्रायः विशेष अधिकार हैं। श्री वेस्टर भेक का कहना है कि भ्रष्टता से पवित्रता