भारतकोश
ब्रह्मचर्य साधना

ब्रह्मचर्य साधना

Brahmacharya Sadhana

स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)

DevanagariHindipublished237 पृष्ठ

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त्रेकाशक का वक्तव्य

श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज के अनुभव पूर्ण उपहार को हिन्दी जनता के ममन्त्र रखते हुये हमें बड़ा ही हर्ष हो रहा है। जन-साधारण के लिये विशेष कर छात्र-छात्राओं के लिये इस पुस्तक की बड़ी आवश्यकता थी। ब्रह्मचर्य-साधना के संबंध में अनुभव-दृष्टि के आधार पर सिनसी बातें यहां दी गई हैं। उतना अन्वच मिलना शायद ही संभव है।

श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज की यह विशेषता है कि उनके नमी ग्रन्थ अपने अपने विषयों में अद्वितीय सिद्ध होते हैं। यह पुस्तक "ब्रह्मचर्य-साधना" भी विद्यार्थियों, ग्रहर्थों, साधकों, पुरुषों, स्त्रियों,—मनो के लिये समान रूप से हितकर है। विद्यार्थियों के लिये तो यह वरदान स्वरूप ही है।

ज्ञान अष्टिकांश व्यक्ति भौतिकवादी सभ्यता का गुलाम बन कर अमरिक बल, शान्ति, शक्ति, निवेक, वैराग्य तथा ज्ञान को खो रहे हैं; तथा काम, क्रोध, दुःख, निराशा, दुर्बलता, रोग, आदि के भीषण ताप से विद्युत् हो रहे हैं। उनके लिये यह पुस्तक साहस, पुरुषार्थ, आशा, नित्य शुद्ध जीवन एवं आत्मसाक्षात्कार का पावन संदेश देती है।

यह पुस्तक मूल ग्रन्थ "Practice of Brahmacharya" का हिन्दी अनुवाद है। श्री स्वामी दिव्यानन्द जी ने इसका हिन्दी अनुवाद कर श्री गुरुदेव के प्रति अपनी अनुपन सेवा प्रदान की है।

श्री स्वामी ज्योतिर्मयानन्द जी ने श्री गुरुदेव के लेखों से द्वितीय अध्याय को संकलित एवं अनुदित किया है। इस संकलन से संयुक्त होकर यह पुस्तक अपने ढंग की निराली सिद्ध होगी।

हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हिंदी जनता इस पुस्तक से मेरणा लेकर ब्रह्मचर्य-जीवन के द्वारा आत्म-साक्षात्कार के मार्ग का अनुगमन करे। सभी अज्ञान एवं मृत्यु के वंधनों से मुक्त होकर ज्ञान एवं अमृतत्व की ज्योति से किंवासित हों। हरि ॐ तत्सत्

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