ब्रह्मचर्य साधना
Brahmacharya Sadhana
स्वामी शिवानन्द सरस्वती द्वारा
स्रोत: 1980 Hindi 2nd Edition (Yoga-Vedanta Forest Academy) · Yoga-Vedanta Forest Academy / The Divine Life Trust Society, Rishikesh · 1980 (उद्गम)
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ब्रह्मचर्य-साधना ही आध्यात्मिक साधना की मूल भित्ति है। शरीर, इन्द्रिय तथा मन की शुद्धता के बिना मनुष्य ब्रह्म-साक्षात्कार प्राप्त नहीं कर सकता। ब्रह्मचर्य साधना सारी भौतिक तथा आध्यात्मिक संपत्तियों की एकमेव कुंजी है। मनुष्य जीवन में अन्य कोई भी विषय इतना महत्व नहीं रखता जितना कि ब्रह्मचर्य। ब्रह्मचर्य महान् तप है। ब्रह्मचर्य महान् धन है। ब्रह्मचर्य आत्मिक-ज्योति का विभासक है। ब्रह्मचर्य की शक्ति ही मनुष्य को देवत्व में परिणत कर डालती है। ब्रह्मचर्य हृदय-पद्म को प्रसकुटित करता है... जिससे कर्णा, दया, धैर्य, शक्ति, शौर्य, सहनशीलता, शुद्धता, अहिंसा, अभय आदि दिव्य गुणों की सुरभि प्रसारित होती है।
ब्रह्मचर्य-साधना के ऊपर अनुभवी एवं व्यावहारिक विवरण एवं उपदेशों को प्राप्त करना आसान नहीं है। इस विषय पर अनुभव सिद्ध पुस्तकों की कमी के कारण युवक गण ब्रह्मचर्य-पथ पर चलने में समर्थ नहीं हो पाते। यह पुस्तक हिंदी जगत के इस भारी अभाव की पूर्ति करेगी।
यह श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज द्वारा लिखित "Practice of Brahmacharya" का सरल भाषानुवाद है। साधकों के हितार्थ इस पुस्तक में द्वितीय अध्याय भी संलग्न किया है जिसमें श्री स्वामी शिवानन्द जी महाराज के ब्रह्मचर्य संबंधी लेखों के संकलन हैं। यह पुस्तक विद्यार्थियों लिये वरदान स्वरूप है। पुरुष अथवा स्त्री, युवक एवं उद्व, गृहस्थी अथवा संन्यासी सभी इससे यथेष्ट लाभ उठा सकते हैं।
आशा एवं विश्वास है कि हमारे प्रयास से हिन्दी भाषा भाषी जन्ता पर्याप्त लाभ उठावेगी तथा शुद्धतामय जीवन-यापन का दृढ़ संकल्प लेकर ब्रह्म-साक्षात्कार के पथ को प्रशस्त करेगी।
इंटर आप सभों को अपनी परग कृपा प्रदान करे।
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