भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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पूर्वाभास

एतदेश-प्रसूतस्य, सकाशाद् अग्र-जन्मनः ।

स्वत्वं चरित्रं शिखेरन्धुश्रिष्यां सर्वमानवाः ॥ (मनुस्मृति)

उस परमपिता परमेश्वर को कोटिशः धन्यवाद है, जिसके अपार कर्ण-कटाक्ष से गत कई वर्षों की मेरी मनः कामना पूरी हुई । जिस ब्रह्मचर्य-विषय के ग्रन्थ के लिखने में, मैं बहुत दिनों तक व्यस्त था, वह आज निर्धिन्न समाप्त हो गया । अतएव इसके प्रस्तुत करने के सम्बन्ध की कुछ आवश्यक बातें यहाँ प्रकट कर देना चाहता हूँ—

‘ब्रह्मचर्य’ बहुत ही गहन विषय है । इसके आध्यात्मिक तत्वों का विवेचन करना, सरल काम नहीं । इसके निरूढ़ रहस्यों को भली भाँति प्रकाशित करने में इसके आचार्य ही कुछ समर्थ हो सकते हैं । इसकी उत्तमता तथा वैज्ञानिकता के सम्बन्ध में इतना ही कह देना पर्याप्त है कि इस पर वारंवार जो कुछ लिखा जाय, या जो कुछ कहा जाय, सो सब थोड़ा है ।

ब्रह्मचर्य जैसे दायित्व-पूर्ण विषय पर अपनी लोछुप लेखनी चला कर, निरस्तन्देह मैंने दुस्साहस का काम किया