भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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ब्रह्मचर्य-विचार्य

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“ब्रह्मचर्य के संरक्षण से मनुष्य को सब लाकों में सुख देने वाली सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं ।”

( मुनिराज क्षत्रि )

“जीवात्मा ब्रह्मचर्य से ही परमात्मा में लीन होता है । आस धर्म ही चारों फल की प्राप्ति का साधन है ।”

( महर्षि व्यास )

“ब्रह्मचर्य-व्रत के पालन से मनुष्य के अशुभ लक्षण भी नष्ट हो जाते हैं ।”

“जो उत्तम धर्म का पालन करता चाहे, वह इस संसार में ब्रह्मचर्य का पालन करे ।”

( पीयूषपाणि धन्वन्तरि )

“हे राजन् ! ब्रह्मचारी को कहीं भी दुःख नहीं होता । उसे सब कुछ प्राप्य है । ब्रह्मचर्य के प्रभाव से अनेक ऋषि ब्रह्मलोक में स्थित हैं ।”

( देवव्रत भीष्म )

“ब्रह्मचारी को सब कुछ सम्भव है । उत्साह से ही सब कार्य सिद्ध होते हैं । वे ही पुरुष-रत्न हैं, जो अपने व्रत का सदा पालन करते हैं ।”

( महावीर हनुमान )

“ब्रह्मचर्य का पालन कर लेने पर, मनुष्य किसी भी आश्रम ( गृहस्थ, वाणप्रस्थ और सन्यास ) में प्रविष्ट हो सकता है ।”

( ऋषाश जाबाकि )

“ब्रह्मचर्य से ही ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त होती है ।”

( ऋषिर विष्णुलाल )