भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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है। यदि ऐसे ग्रन्थ बालकों और कन्याओं के पाठ्य-क्रम में रखे जायें, तो मेरे विचार से उनके दैनिक विद्याभ्यास, सदाचार और ब्रह्मचर्य के पालन में, बहुत कुछ कर्तव्य-ज्ञान प्राप्त हो सकता है। इसलिये देश के सुयोग्य माता-पिता, विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिका, विद्यार्थियों के अभिभावकों तथा सुधारक महोदयों से विनम्र विनय है कि वे इस ग्रन्थ का घर-घर प्रचार कर, लेखक को समेकित रूप में अनुगृहीत करें !

यह ग्रन्थ अत्यन्त शीघ्रता में प्रकाशित हुआ है। इसलिये इसमें जहाँ कहीं संशोधन तथा मुद्रण की अशुद्धियाँ या त्रुटियाँ रह गई हों, उनके लिये पाठक-पाठिकाओं से क्षमा-प्रार्थना है। आशा है, द्वितीय संस्करण में उचित सुधार हो सकेगा। ॐ शम् ।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः ।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, नकरिष्यद्बुःखमानुयात् ॥

महाशिवरात्रि सं० १६म्बर } रामनगर-काशीराज्य }

चिनीत जगन्नारायणदेव शर्मा