ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
पृष्ठ 16, कुल 380 में से
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हैं। शास्त्रों की बातें कभी मिथ्या नहीं होतीं। धैर्य, उत्साह, प्रेम, विश्वास तथा नव्रता-पूर्वक अपनी जाति में ब्रह्मचर्य का वातावरण उत्पन्न करो, फिर तो आपके उद्धार में किंचिन्मात्र सन्देह नहीं रह जायगा। हमारा प्रबल अनुरोध है कि इस ग्रन्थ को पढ़ कर ही न रह जाओ, बल्कि उसके विचारों को कार्य-रूप में परिणत करने का पूर्ण व्रत लो। कदाचित् एक दो बार असफल होओ, पर अन्त में आपको सफलता अवश्य मिलेगी। इसे सत्य समझो! अपने पूर्वजों का इतिहास देखो और उनके महा-मन्त्र ब्रह्मचर्य का प्रचार करना, अपना सर्व-श्रेष्ठ धर्म समझो। इसी में सुख मिलेगा—इसी में शान्ति मिलेगी।
इस ग्रन्थ के लिखने के पूर्व मैंने अनेक पुराने तथा नये ग्रन्थों का एवं पत्र-पत्रिकाओं का अवलोकन, एवं आवश्यक सार-संग्रह किया है। अतएव मैं उनके उपदेष्टा, कर्ता तथा सम्पादक महाशयों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता प्रकट करता हूँ। क्योंकि उनके साहाय्य के बिना मेरा कार्य और भी कठिन होता।
मैं अपने साहित्य-समालोचकों से सांख्योपनिषेद विवेदन करता हूँ कि वे इस ग्रन्थ के दोषों तथा अभावों को विशेषतः दिलाने की कृपा करें। ऐसा करने से मैं कृतज्ञता-पूर्वक इसके द्वितीय संस्करण में समुचित सुधार कर देने में समर्थ हो सकूँगा।
ब्रह्मचर्य-विषय के ग्रन्थों के प्रचार की देश के कोने-कोने में, विशेष कर हिन्दुओं के घर-घर में बहुत बड़ी आवश्यकता