भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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कन्या और ब्रह्मचर्य

पढ़ने का अधिकार है, तब वे ब्रह्मचर्य के पालन से किस प्रकार विमुख रह सकती हैं।

ऋग्वेद के दसवें मण्डल के ३९, ४० सूक्त में घोषा नाम की ब्रह्मचारिणी कन्या द्वारा प्रकट किये हुए मन्त्र हैं। वनमें स्पष्ट रूप से ब्रह्मचारिणी कन्या के वैद्याध्ययन के समय से लेकर, उनके गृहस्थाश्रम में पैर रखने तक के प्रायः सभी कर्तव्यकर्मों का वर्णन है। फिर कैसे कहें कि स्त्रियाँ वेद पढ़ने और ब्रह्मचर्य पालन करने की अधिकारिणी नहीं।

बालकों के ब्रह्मचर्य-विषय में तो किसी को सन्देह ही नहीं, पर कन्याओं को भी ब्रह्मचर्य का पूर्ण अधिकार है। कोई वेद ऐसा नहीं जो इस बात का विरोध करता हो। हमारी इस बात का समर्थन-प्रमाण अथर्ववेद के एक मन्त्र से भी हो सकता है जो सबसे ऊपर दिया गया है।

यदि हम नीति-शास्त्र के अनुसार भी विचार करते हैं, तो भी कन्याओं के लिये ब्रह्मचर्य उत्तम ही आवश्यक ज्ञान पड़ता है, जितना कि बालकों के लिये। क्या एक ब्रह्मचारी और वेदज्ञ-पुरुष कभी भी एक ब्रह्मचर्य-रहिता और वेद-विहीना स्त्री से विवाह कर सकेगा ?

कुमार्यं शिष्येद् विद्याः धर्म-नीतौ निवेशयेत् ।

दुर्यः कल्याणद्वा प्रोक्ता, या विद्यामधि गच्छति ॥

(देसादि)

कुमारी को विद्या पढ़ानी चाहिये। उसी भाँति धर्म और नीति में भी प्रवेश कराना योग्य है। जो कन्या विदुषी होती है, उससे दोनों कुलों का कल्याण होता है।