भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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मादक द्रव्य-सेवन

(८)—मादक द्रव्य-सेवन

“बुद्धिं लुप्तति यद्द्रव्यं, मदकारी तदुच्यते ।”

(वैशक)

जिस वस्तु से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो, उसे मदकारी या मादक कहते हैं ।

“मद्य मांसञ्च वर्जयेत् ।”

(मनुस्मृति)

मदिरा और मांस का सेवन करना वर्जित है ।

भारतवर्ष में मादक द्रव्यों का प्रचार दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है । इससे हिन्दू-समाज की जो हानि हो रही है, वह कहे में नहीं आ सकती ।

धर्म-शास्त्र के अनुसार मदिरा और मांस तामसीय पुरुषों और राक्षसों का आहार है । पौराणिक काल में भी अशुरों के अतिरिक्त कोई भी मादक द्रव्यों का सेवन नहीं करता था । पर काल के प्रभावसे अब बहुत ही कम लोग ऐसे हैं, जो एक न एक प्रकार के मादक द्रव्य का सेवन न करते हों ।

मादक द्रव्य भी हमारे वीर्य के नाश करने में अग्रेसर हो रहे हैं । बहुत से लोग मानसिक दुर्बलता के कारण मादक द्रव्य का एक बार सेवन कर, फिर जन्म भर उससे नहीं छूट सकते । देश के कुछ सत्पुरुषों ने मादक द्रव्य के बहिष्कार करने के लिये बहुत ग्रन्थ किया, पर दुर्भाग्य-वशा पूरी सफलता नहीं मिली । देखें, इन मादक द्रव्यों से कब समाज का पिछड़ छूटता है !