भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

पृष्ठ 377, कुल 380 में से

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ब्रह्मचर्य-विनय

( पद्म पदी छन्द )

मे ऋषियों का परम ध्येय दुःख दूरने वाला !

तेज तथा उत्साह-ज्ञान से भरने वाला ॥

तेरी महिमा जान मनुज होता है नामी ।

तू है जग का तत्त्व गुणों में है अभिरामी ॥

तेरी सेवा से सदा, मिलती सच्ची सुक्ति है ।

तुम्हसे बढ़ स्वातंत्र्य की, अपर न कोई युक्ति ॥

तू ही सब विज्ञान-ज्ञान का देने वाला ।

तू कर देता काम देव का है सुख काला ॥

तुम्ह से ही सब धर्म कर्म हैं उज्ज्वल होते ।

तुम्हें थार धीमान बीज उन्नति के होते ॥

तेरा यश त्रैलोक्य में, पावन और ललाम है ।

ब्रह्मचर्य ! मन में रमे, तुम्हको विनय-प्रणाम है ॥

कविगुप्तर

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