ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
DevanagariHindipublished380 पृष्ठ
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ब्रह्मचर्य-विनय
( पद्म पदी छन्द )
मे ऋषियों का परम ध्येय दुःख दूरने वाला !
तेज तथा उत्साह-ज्ञान से भरने वाला ॥
तेरी महिमा जान मनुज होता है नामी ।
तू है जग का तत्त्व गुणों में है अभिरामी ॥
तेरी सेवा से सदा, मिलती सच्ची सुक्ति है ।
तुम्हसे बढ़ स्वातंत्र्य की, अपर न कोई युक्ति ॥
तू ही सब विज्ञान-ज्ञान का देने वाला ।
तू कर देता काम देव का है सुख काला ॥
तुम्ह से ही सब धर्म कर्म हैं उज्ज्वल होते ।
तुम्हें थार धीमान बीज उन्नति के होते ॥
तेरा यश त्रैलोक्य में, पावन और ललाम है ।
ब्रह्मचर्य ! मन में रमे, तुम्हको विनय-प्रणाम है ॥
कविगुप्तर