ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान
Brahmacharya Vigyaan
पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा
स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)
DevanagariHindipublished380 पृष्ठ
पृष्ठ 6, कुल 380 में से
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समर्पण
महामना मालवीयजी महाराज,
आप भारत-भूमि के एक जाज्वल्यमान रत्न हैं। हिन्दू-जनता आपको सनातन-वैदिक-धर्म का एक सच्चा सेवक समझती है। आप एक कर्मनिष्ठ ब्राह्मण हैं। विद्या-बुद्धि के लिये आपने स्वयंभूपाथ से 'काशी-विश्व-विद्यालय' जैसा यशस्वतम खड़ा किया है। आपाविधि-वत् ब्रह्मचर्य के पूर्ण पक्षपाती एवं गृहस्थ ब्रह्मचारी हैं। यह तो आप जानते ही हैं कि ब्राह्मण, विद्या तथा ब्रह्मचर्य का आपस में कितना घनिष्ठ सम्बन्ध है। पतंजय यह
‘ब्रह्मचर्य-विज्ञान’
नामक लघु ग्रन्थ आपके ही कर-कमलों में सश्रद्धा समर्पित है। आशा है, शुद्धता पर ध्यान न देकर, इसे अवश्य स्वीकार करने की अनुकम्पा करेंगे। शम्भु !
भवदीय—
जगज्जारायणदेव शर्मा