भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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भूतले ?” ब्रह्मचर्य का साधन अत्यंत कठिन है; विशेष कर ऐसे समाज में, जहाँ लोगों का नित्य का कार्य-क्रम ब्रह्मचर्य-पालन के अनुकूल नहीं है। पर यह कठिन साधन जो साध सकता है, संसार में कोई ऐसी वस्तु नहीं है, जो उसे सिद्ध न हो।

हमारे समाज के सामने इस समय अनेक ऐसी कठिनाइयाँ उपस्थित हैं, जिन्हें हल करना मनुष्य की बुद्धि और शक्ति के बाहर का काम हो रहा है। कहते हैं, हिन्दू-जाति के सामने जीवन-मरण का प्रश्न उपस्थित है। पर जीवन या मरण का निर्णायक ब्रह्मचर्य है। मरणोपरांत समाज के लिये ब्रह्मचर्य ही संजीवनी विद्या है ! इसकी आवश्यकता और उपयोगिता के सम्बन्ध में दो मत ही ही नहीं सकते। बहुत से प्रश्न जो हल नहीं, हो रहे हैं, वे समाज में ब्रह्मचर्य धारण करने वालों की संख्या के बढ़ने से आप ही हल हो जायेंगे। शारीरिक तथा चैतन्यिक बल का यही आधार है।

हम लोग इस विद्या को भूल गये हैं। इसलिये इसकी ओर ध्यान दिलाने के सब प्रयत्नों का होना नितान्त आवश्यक है। पं० जगन्ना-रायण् देवशर्माजी की इस पुस्तक का इसी लिये हम स्वागत करते हैं। इसमें लेखक ने ब्रह्मचर्य की मद्दिमा और विधि के विषय में बहुत अच्छा संग्रह किया है, जो सर्वसाधारण तथा विद्यार्थी-युवकों के लिये तो बहुत उपकारक होगा। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने ब्रह्म-