भारतकोश
ब्रह्मचर्य विज्ञान

ब्रह्मचर्य विज्ञान

Brahmacharya Vigyaan

पं. जगन्नारायणदेव शर्मा द्वारा

स्रोत: Sarvahitkari Grantha Mala · Sarvahitkari (उद्गम)

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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वय का विवेचन करते हुए, ब्रह्मचर्य के प्राचीन आदर्श को सामने रखा है, जिसमें वीर्य-रक्षा और उसके परम पुरुषार्थ की सिद्धि से उपयोग—दोनों का अन्तर्भाव होता है। ब्रह्मचर्य का पदार्थ और भावार्थ भी ऐसा ही है। ब्रह्मचर्य की महिमा का वर्णन करने में लेखक ने बहुत विस्तार किया है, परंतु हमारी समझ से वह व्यर्थ न होगा। इस विस्तार में प्राचीन ग्रन्थों से जो अवतरण उद्घोषित दिये हैं, वे बहुत ही रक्तविद्याक और समय पर काम देने वाले हैं। प्रस्तुत विषय के संबंध में सभी विचारणीय बातों का समावेश इस पुस्तक में किया गया है, जिससे पुस्तक सब के लिये बड़े काम की हुई है। ऐसी पुस्तकों का देश में जितना प्रचार हो, उतना अच्छा है। हमारे समाज में जितने अधिक लोग ब्रह्मचर्य के महत्व को समझेंगे, जितने अधिक लोग उसका पालन करेंगे, हमारे समाज का भौतिक और नैतिक बल उतना ही अधिक बढ़ेगा। ब्रह्मचर्य का बल ही हमारी सब समस्याओं को हल करेगा।

फाल्गुन शुद्ध २, सं० १९८३

खच्चमणोरायण गर्द