भारतकोश
ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

Brahmacharyamrit Arthat Jeevan Sandesh

स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: गुरुकुल झज्जर संस्करण · गुरुकुल झज्जर (हरियाणा) (उद्गम)

DevanagariHindipublished26 पृष्ठ

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१९ | जीवन सन्देश

प्रकार का सन्देह नहीं।

मनुष्य अपने जीवन को सुन्दर, सुखी और शान्त बनाने के लिये अनेक प्रकार के यत्न करता है, परन्तु जब तक वह ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करता, तब तक उसे सच्ची शान्ति और सुख प्राप्त नहीं हो सकता। ब्रह्मचर्य ही जीवन का मूल आधार है। जो मनुष्य वीर्य की रक्षा करता है, उसका शरीर पुष्ट, मन प्रसन्न और बुद्धि तीव्र होती है। इसके विपरीत जो मनुष्य वीर्य का नाश करता है, वह दुर्बल, रोगी, अल्पायु और निस्तेज हो जाता है।

अतः प्रत्येक युवक और युवती का यह परम कर्तव्य है कि वह ब्रह्मचर्य के महत्व को समझे और अपने जीवन में उसका दृढ़तापूर्वक पालन करे। विषय-वासनाओं के जाल में फँसकर अपने अमूल्य जीवन को नष्ट न करे। सदा उत्तम विचारों का चिन्तन करे, सत्पुरुषों की संगति करे और ईश्वर की उपासना में मन लगावे। इसी से उसका लोक और परलोक दोनों सुधर सकते हैं।

ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करने से मनुष्य दीर्घायु, बलवान् और यशस्वी बनता है। हमारे प्राचीन ऋषियों-महर्षियों ने ब्रह्मचर्य के बल पर ही महान् कार्य किये और संसार का मार्गदर्शन किया।